80 Day Planner Day 40- 26 July 2019

1.Despite having 26.53% Vote share Congress was unable to cross 60 figure and on the hand with 44.9% Vote share BJP has crossed 250+ figure in recently Concluded 16th Loksabha Election. Isn’t this blot on our system of election? Should we move away from present system towards Proportional representation? Present your views with suitable argument.

26.53% वोट शेयर के साथ कांग्रेस 60 का आंकड़ा पार नहीं कर पाई और 44.9% वोट शेयर के साथ बीजेपी ने हाल ही में हुए 16 वें लोकसभा चुनाव में 250+ का आंकड़ा पार कर लिया है। क्या यह हमारी चुनाव प्रणाली पर धब्बा नहीं है? क्या हमें वर्तमान व्यवस्था से  आनुपातिक प्रतिनिधित्व की ओर चाहिए? अपने विचारों को उपयुक्त तर्क के साथ प्रस्तुत करें।

Reference: 2015 Law Commission Report on Election

  1. Polls are merely the means for selecting governments and not an end in themselves. But with frequent elections, the means tend to become the end and the end is reduced to being the incidental. In this light discuss whether we should go for one nation one poll system

सरकारें चुनने के लिए मतदान केवल एक साधन है और अपने आप में अंत नहीं है। लेकिन लगातार चुनावों के साथ, साधन अंत हो जाते हैं और अंत गौण हो जाता है । इस प्रकाश में चर्चा करते हैं कि क्या हमें एक राष्ट्र एक चुनाव प्रणाली के लिए जाना चाहिए

3.. एक चरम पर, न्यायिक नियंत्रण की शक्ति प्रभावी प्रशासन को लकड़हारा कर सकती है,  और दूसरी तरफ नतीजा आक्रामक नौकरशाही अत्याचार हो सकता है,  न्यायिक प्रशासन संबंधों  में उचित संतुलन कहाँ किया जा सकता है यह एक बड़ी समस्या है। टिप्पणी कीजिए

At one extreme, the vigor of judicial control may paralyze effective administration at the other the result may be offensive bureaucratic tyranny, exactly where the balance may be best struck is a major problem of Judicial administration relationship. Comment

4.Indian ministerial organisation logic is not based on rationalisation principle and suffers from various governance hurdle. Comment.

भारतीय मंत्रालय सरंचना तार्किकरण अवधारणा पर आधारित नहीं है और विभिन्न अभिशासन समस्याओं से ग्रसित है | चर्चा करे