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उचित ही समाप्त: संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में पारित नहीं हो सका।

(Source – The Hindu, International Edition, Page no.-8 )

विषय : GS पेपर: GS-2 संविधान; विधिक/संवैधानिक व्याख्या

समाचार में क्यों: संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाने के कारण पारित नहीं हो सका, जिससे परिसीमन, महिला आरक्षण और प्रतिनिधित्व में संघीय संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई।

मुख्य बिंदु

  • संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।
  • सरकार ने परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित विधेयकों को आपसी संबंध का हवाला देते हुए वापस ले लिया।
  • 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी की आशंका जताई गई।
  • अमित शाह द्वारा सीटों में समानुपातिक वृद्धि का मौखिक आश्वासन दिया गया, परंतु इसे विधेयक में शामिल नहीं किया गया।
  • विपक्षी दलों ने एकजुट होकर विधेयक का विरोध किया और व्यापक सहमति व उचित संसदीय प्रक्रिया की मांग की।

संवैधानिक संशोधन की विफलता

  • यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सका।
  • इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े।
  • उपस्थित और मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से 352 मतों की आवश्यकता थी।
  • मजबूत विपक्षी एकता के कारण परिणाम पहले से ही अनुमानित था।

सरकार की प्रतिक्रिया और आश्वासन

  • सरकार ने परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े प्रस्ताव वापस ले लिए।
  • दक्षिणी राज्यों के लिए समानुपातिक प्रतिनिधित्व का आश्वासन दिया गया।
  • लोकसभा सीटों में 50% समान वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया।
  • यह आश्वासन केवल मौखिक रहा, विधेयक में शामिल नहीं था।

परिसीमन के आधार पर चिंताएँ

  • विधेयक 2011 की जनगणना पर आधारित था।
  • इससे दक्षिणी, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता था।
  • कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को नुकसान होता।
  • 2026–27 की नई जनगणना जारी होने के कारण जल्दबाजी पर प्रश्न उठे।

विधायी दृष्टिकोण की आलोचना

  • महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना विवादास्पद माना गया।
  • इससे भ्रम और अविश्वास की स्थिति बनी।
  • विधेयक के प्रावधानों में स्पष्टता की कमी रही।

राजनीतिक स्थिति और आगे की राह

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने मिलकर विरोध किया।
  • तेलुगु देशम पार्टी और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने संभावित नुकसान के बावजूद समर्थन दिया।
  • आगे की प्रक्रिया में:
    • जनगणना पूरी करना
    • संसदीय समिति से परामर्श
    • व्यापक सहमति बनाना
  • यह घटना दो-तिहाई बहुमत की संवैधानिक सुरक्षा के महत्व को दर्शाती है।

निष्कर्ष

इस विधेयक की विफलता यह दर्शाती है कि संरचनात्मक सुधारों के लिए संवैधानिक सुरक्षा और व्यापक राजनीतिक सहमति आवश्यक है
परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ।

आगे बढ़ते हुए, सरकार को चाहिए कि:

  • जनगणना पूरी करे
  • पारदर्शी परिसीमन सुनिश्चित करे
  • सहकारी संघवाद के आधार पर सहमति बनाए

यह घटना संसद की उस भूमिका को भी पुनः स्थापित करती है, जिसमें वह एकतरफा निर्णयों को रोककर क्षेत्रीय संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की रक्षा करती है।


वर्णनात्मक प्रश्न

प्रश्न:
“परिसीमन और प्रतिनिधित्व सुधारों में जनसंख्या आधारित वास्तविकताओं और संघीय संतुलन के बीच संतुलन आवश्यक है।” संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)


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