The Hindu Editorial Analysis in Hindi
24 April 2026
हिंसा का चक्र
(Source – The Hindu, International Edition – Page No. – 8)
विषय : GS पेपर: GS-3 : आंतरिक सुरक्षा; उग्रवाद-विकास संबंध
संदर्भ
मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष गहरे अविश्वास, राजनीतिकरण, विलंबित प्रशासनिक प्रतिक्रिया, कमजोर शांति प्रयासों और बार-बार होने वाली हिंसा के कारण बना हुआ है। यह संघर्ष दुष्प्रचार, कट्टरपंथी तत्वों और समावेशी संवाद की कमी से और जटिल हो गया है।

मुख्य बिंदु
समुदायों के बीच लगातार जातीय विभाजन और अविश्वास
उत्तेजक घटनाएँ (जैसे विस्फोट) हिंसा के चक्र को फिर से सक्रिय करती हैं
दुष्प्रचार तनाव को और बढ़ाता है
मजबूत सुरक्षा कार्रवाई और समावेशी शांति निर्माण की आवश्यकता
जातीय संघर्षों की जटिलता
जातीय संघर्ष सरकारों के लिए सुलझाना अत्यंत कठिन होता है क्योंकि इसमें गहरी जड़ें जमा चुकी शत्रुता होती है
समुदायों के बीच विभाजन कठोर बने रहते हैं और सुलह के प्रयासों का विरोध होता है
पहचान आधारित ध्रुवीकरण के कारण हिंसा लगातार बनी रहती है
शांति उन्मुख सरकारें भी विश्वास निर्माण में कठिनाई महसूस करती हैं
हर घटना को जातीय दृष्टिकोण से देखा जाता है
शासन संबंधी विफलताओं की भूमिका
प्रारंभिक हस्तक्षेप की कमी से तनाव बढ़ गया
प्रतिक्रिया में देरी ने संघर्ष को और तीव्र किया
कमजोर शासन से सामान्य स्थिति बहाल करने की संभावना घटती है
नागरिक समाज के प्रयास सीमित हो जाते हैं
संस्थागत कमजोरियाँ दीर्घकालिक अस्थिरता को बढ़ाती हैं
मणिपुर की वर्तमान स्थिति
मणिपुर लंबे समय से जातीय संकट का सामना कर रहा है
युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में तनाव प्रबंधन में कठिनाई रही
बिष्णुपुर में विस्फोट की घटना ने हिंसा को फिर से भड़का दिया
कुकी समूहों के खिलाफ आरोपों ने विरोध और झड़पों को जन्म दिया
राज्य लगातार हिंसा के चक्र में फंसा हुआ है
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सीमाएँ
भारतीय जनता पार्टी ने शांति बहाल करने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद की
एन. बीरेन सिंह का इस्तीफा सुधारात्मक कदम माना गया
राष्ट्रपति शासन भी स्थायी स्थिरता सुनिश्चित करने में विफल रहा
नई सरकार से मध्यमार्गी शासन की अपेक्षा थी
कुल मिलाकर प्रतिक्रिया का प्रभाव सीमित रहा
शांति बहाली के लिए आगे की राह
“गाजर और डंडा” नीति अपनाई जाए
शांति को बढ़ावा देने वाले नागरिक समाज को सशक्त बनाया जाए
हिंसक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
केंद्र सरकार की भूमिका को अधिक सक्रिय बनाया जाए
यदि सक्रिय कदम नहीं उठाए गए तो हिंसा का चक्र जारी रहेगा
निष्कर्ष
मणिपुर में स्थायी शांति केवल नेतृत्व परिवर्तन या अस्थायी नियंत्रण से संभव नहीं है। इसके लिए मजबूत शासन, समावेशी संवाद और जवाबदेही पर आधारित समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। केंद्र सरकार को राजनीतिक गणनाओं से ऊपर उठकर मेल-मिलाप को प्राथमिकता देनी चाहिए, नागरिक समाज को सशक्त करना चाहिए और हिंसा के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए, तभी जातीय संघर्ष के इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।