The Hindu Editorial in Hindi
19 June 2026
NFHS-6 से पोषण संबंधी चुनौतियों के बीच हुई प्रगति का पता चलता है।
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
Topic: GS-2: स्वास्थ्य | पोषण | मानव विकास, GS-3: सामाजिक क्षेत्र का विकास
संदर्भ
• NFHS-6 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6) भारत के स्वास्थ्य एवं पोषण की मिश्रित तस्वीर प्रस्तुत करता है।
• अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) में कमी, संस्थागत प्रसव और टीकाकरण में सुधार हुआ है।
• इसके बावजूद बाल पोषण, स्तनपान प्रथाएँ और आहार विविधता अभी भी गंभीर चिंता के विषय हैं।

मुख्य निष्कर्ष (NFHS-6)
सकारात्मक रुझान
• अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) 35.5% से घटकर 29.3% हुई।
• संस्थागत प्रसव 90% तक पहुँचे।
• कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति में प्रसव (Skilled Birth Attendance) 91% तक बढ़ा।
• मातृ स्वास्थ्य जाँच सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
• 12–23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87% तक पहुँचा।
स्थायी चुनौतियाँ
• क्षीणता (Wasting) के स्तर में विशेष सुधार नहीं हुआ।
• केवल लगभग 50% नवजातों को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराया जाता है।
• केवल लगभग 60% बच्चों (6–8 माह) को पूरक आहार मिलता है।
• केवल 15% बच्चों (6–23 माह) को पर्याप्त एवं संतुलित आहार प्राप्त होता है।
कुपोषण क्यों बना हुआ है?
- खराब शिशु आहार प्रथाएँ
• स्तनपान शुरू करने में देरी।
• पूरक आहार का अपर्याप्त उपयोग।
• आहार में विविधता का अभाव।
• अभिभावकों में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी।
- मातृ गरीबी एवं देखभाल का बोझ
• महिलाएँ घरेलू एवं कृषि कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी निभाती हैं।
• बाल देखभाल सुविधाओं तक सीमित पहुँच।
• बच्चों की देखभाल और स्तनपान के लिए पर्याप्त समय का अभाव।
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता प्रभाव
• पैकेज्ड एवं प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर बढ़ती निर्भरता।
• दाल, फल, सब्जियों एवं पशु-आधारित प्रोटीन का कम सेवन।
• पोषण विविधता की जगह कैलोरी-समृद्ध खाद्य पदार्थों का उपयोग।
महत्त्वपूर्ण अवधि : पहले 1,000 दिन
• गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक का समय।
• इसी अवधि में मस्तिष्क का अधिकांश विकास होता है।
• इस दौरान पोषण की कमी जीवनभर के नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
• वृद्धि में रुकावट (Growth Faltering) की शीघ्र पहचान आवश्यक है।
अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका
ASHA, AWW एवं ANM नेटवर्क
• बच्चों की वृद्धि की निगरानी।
• टीकाकरण एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग।
• पोषण संबंधी परामर्श प्रदान करना।
• जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और रेफरल।
आवश्यक सुधार
• पोषण परामर्श हेतु बेहतर प्रशिक्षण।
• पोषण डेटा का वास्तविक समय (Real-Time) विश्लेषण।
• जिला स्तर पर पोषण विशेषज्ञों एवं डेटा विश्लेषकों की नियुक्ति।
• निगरानी एवं मार्गदर्शन के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग।
UPSC मूल्य संवर्धन
प्रमुख पोषण पहलें
• पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)
• सक्षम आंगनवाड़ी मिशन
• मिशन पोषण 2.0
• एनीमिया मुक्त भारत
• पीएम-पोषण योजना (PM-POSHAN)
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)
बाल कुपोषण के प्रमुख कारण
• गरीबी
• खराब शिशु आहार प्रथाएँ
• मातृ कुपोषण
• स्वच्छता की कमी
• असुरक्षित पेयजल
• आहार विविधता का अभाव
मुख्य चुनौतियाँ
• पोषण परिणामों में क्षेत्रीय असमानताएँ।
• स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता क्षेत्रों के बीच कमजोर समन्वय।
• कामकाजी माताओं के लिए अपर्याप्त बाल देखभाल सुविधाएँ।
• प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत।
• सर्वेक्षण डेटा के उपयोग में देरी।
आगे की राह
• विशुद्ध स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) को बढ़ावा देना।
• समय पर पूरक आहार सुनिश्चित करना।
• आंगनवाड़ी अवसंरचना एवं पोषण परामर्श को सुदृढ़ करना।
• सामुदायिक क्रेच सुविधाओं का विस्तार करना।
• स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के माध्यम से आहार विविधता बढ़ाना।
• NFHS डेटा के आधार पर जिला-स्तरीय कार्ययोजनाएँ तैयार करना।
• बाल देखभाल एवं पोषण में पुरुषों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
निष्कर्ष
• NFHS-6 दर्शाता है कि भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और बाल जीवितता में उल्लेखनीय प्रगति की है।
• लेकिन पोषण अभी भी एक गंभीर विकासात्मक चुनौती बना हुआ है।
• स्थायी सुधार के लिए आँकड़ों को समयबद्ध नीतिगत कार्रवाई में बदलना आवश्यक है।