The Hindu Editorial in Hindi
20 June 2026
भारत में सबसे सस्ती बिजली आ गई है, ग्रिड को भी इसके साथ तालमेल बिठाना होगा।
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
Topic: GS-3: ऊर्जा सुरक्षा | बुनियादी ढांचा | नवीकरणीय ऊर्जा | जलवायु परिवर्तन
संदर्भ
भारत विश्व के सबसे कम लागत वाले नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों में शामिल हो चुका है।
सौर एवं पवन ऊर्जा अब कई पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में सस्ती हो गई हैं।
हालाँकि, विद्युत संचरण (Transmission) अवसंरचना अब सबसे बड़ी बाधा बनकर उभर रही है।
वर्तमान में 50 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता केवल अपर्याप्त ग्रिड कनेक्टिविटी के कारण उपयोग में नहीं आ पा रही है।

मुख्य चिंता
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ सामान्यतः 12–18 महीनों में तैयार हो जाती हैं, जबकि नई ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में 3–5 वर्ष लग जाते हैं।
विलंब के प्रमुख कारण:
• भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएँ
• अनेक नियामकीय स्वीकृतियाँ
• राइट-ऑफ-वे (Right of Way) से जुड़ी बाधाएँ
• ट्रांसमिशन कॉरिडोर की सीमाएँ
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के पास वर्तमान में:
• 250 GW स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
• 100 GW क्षमता निर्माणाधीन
भविष्य में बढ़ती ऊर्जा मांग तथा विद्युतीकरण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारत को वर्ष 2050 तक लगभग 2,000 GW क्षमता की आवश्यकता हो सकती है।
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा अवसर
1. सबसे सस्ते ऊर्जा स्रोत
• सौर और पवन ऊर्जा भारत में सबसे सस्ते विद्युत स्रोत बन चुके हैं।
• बैटरी की कीमतों में गिरावट से ऊर्जा भंडारण (Storage) अधिक व्यवहार्य हो रहा है।
• स्वच्छ एवं विश्वसनीय बिजली प्रतिस्पर्धी लागत पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
2. ग्रिड अब नई चुनौती
• उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ रही है।
• ट्रांसमिशन अवसंरचना समान गति से विकसित नहीं हो रही।
• ग्रिड विस्तार के बिना नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा।
चार प्रमुख अवसर
1. नवीकरणीय परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण
• सौर ऊर्जा मुख्यतः दिन के समय उपलब्ध होती है।
• बैटरियाँ शाम के पीक-लोड समय में बिजली उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
• मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।
• इससे लगभग 400 GW अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को जोड़ा जा सकता है।
2. मौजूदा कोयला-आधारित कॉरिडोर का उपयोग
• कई ताप विद्युत संयंत्र अपनी पूर्ण क्षमता से कम पर संचालित हो रहे हैं।
• उनकी ट्रांसमिशन अवसंरचना का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है।
• कोयला संयंत्रों के आसपास नवीकरणीय परियोजनाएँ विकसित कर अतिरिक्त ग्रिड क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।
• इससे लगभग 100 GW अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा को समर्थन मिल सकता है।
3. मौजूदा सबस्टेशनों का बेहतर उपयोग
• वर्तमान सबस्टेशन अधिक नवीकरणीय परियोजनाओं को जोड़ने में सक्षम हैं।
• बैटरी एकीकरण से लोड प्रबंधन बेहतर हो सकता है।
• बड़े नए निवेश के बिना परियोजनाओं को शीघ्र जोड़ा जा सकता है।
4. उन्नत चालक (Advanced Conductors)
• आधुनिक उच्च-क्षमता वाले कंडक्टर ट्रांसमिशन क्षमता को लगभग दोगुना कर सकते हैं।
• अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होती।
• मौजूदा कॉरिडोर की दक्षता बढ़ती है।
UPSC वैल्यू एडिशन
नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण की प्रमुख चुनौतियाँ
• ट्रांसमिशन अवरोध (Bottlenecks)
• भूमि अधिग्रहण में विलंब
• ग्रिड संतुलन संबंधी समस्याएँ
• ऊर्जा भंडारण की सीमाएँ
• नवीकरणीय ऊर्जा की अनिरंतर (Intermittent) प्रकृति
प्रमुख सरकारी पहलें
• PM Gati Shakti
• Green Energy Corridors
• National Electricity Plan
• National Green Hydrogen Mission
• Battery Energy Storage Systems (BESS)
ग्रिड आधुनिकीकरण क्यों आवश्यक है?
आर्थिक लाभ
• बिजली की लागत में कमी
• ट्रांसमिशन हानियों में कमी
• नवीकरणीय ऊर्जा का तेज एकीकरण
• औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि
ऊर्जा सुरक्षा लाभ
• जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी
• वैश्विक ऊर्जा झटकों के प्रति अधिक लचीलापन
• जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन
पर्यावरणीय लाभ
• तेज डी-कार्बोनाइजेशन
• ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
• वायु गुणवत्ता में सुधार
चुनौतियाँ
• ट्रांसमिशन नेटवर्क में उच्च प्रारंभिक निवेश
• नियामकीय एवं स्वीकृति संबंधी विलंब
• केंद्र एवं राज्यों के बीच समन्वय की कमी
• उन्नत ग्रिड तकनीकों का धीमा अपनाव
• बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण हेतु वित्तपोषण की आवश्यकता
आगे की राह
• नए कॉरिडोर बनाने से पहले मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क का उन्नयन किया जाए।
• बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ विकसित की जाएँ।
• Green Energy Corridors का विस्तार किया जाए।
• उन्नत कंडक्टर तकनीकों को प्रोत्साहित किया जाए।
• नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों को ट्रांसमिशन योजना से जोड़ा जाए।
• स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज करने हेतु केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत किया जाए।
• स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणालियों का विकास किया जाए।
निष्कर्ष
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की लागत से नहीं, बल्कि उस ऊर्जा को देशभर में कुशलतापूर्वक पहुँचाने की क्षमता से सीमित हो रही है।
ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण एक ऐसे विद्युत ग्रिड के निर्माण पर निर्भर करेगा जो अधिक स्मार्ट, अधिक तेज़ और अधिक लचीला हो।
स्मरणीय पंक्ति
“आज ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन नहीं, बल्कि उसे सही समय पर सही स्थान तक पहुँचाने की क्षमता भी है।”