The Hindu Editorial in Hindi
24 June 2026
भारत की अगली चुनौती — आविष्कार से ग्लोबल स्तर तक
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
विषय: GS-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी | इनोवेशन | औद्योगिक विकास, GS-2: गवर्नेंस | प्रौद्योगिकी नीति
संदर्भ
भारत ने समय-समय पर अपनी मजबूत वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
फिर भी अनेक नवाचार (Innovations) वैश्विक स्तर के उद्योगों में परिवर्तित नहीं हो सके।
संपादकीय का तर्क है कि भारत की अगली चुनौती आविष्कार (Invention) नहीं, बल्कि नवाचारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों में परिवर्तित करना है।

मुख्य तर्क
केवल नवाचार पर्याप्त नहीं है।
दीर्घकालिक सफलता के लिए आवश्यक हैं:
• बड़े पैमाने पर विस्तार (Scale)
• पूंजी (Capital)
• विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Manufacturing Ecosystem)
• वैश्विक बाजार (Global Markets)
• व्यावसायीकरण (Commercialisation)
मुख्य विचार:
“भविष्य उनका नहीं है जो सबसे पहले आविष्कार करते हैं, बल्कि उनका है जो सबसे बेहतर तरीके से विस्तार करते हैं।”
भारत के अनुभवों से सीख
सेमिकंडक्टर कॉम्प्लेक्स लिमिटेड (SCL)
• 1970 के दशक में स्थापित किया गया।
• भारत ने सेमिकंडक्टर के महत्व को प्रारम्भिक स्तर पर ही पहचान लिया था।
• फिर भी वैश्विक सेमिकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित नहीं कर सका।
कारण:
• सीमित पूंजी
• छोटे पैमाने का विनिर्माण
• नीतिगत असंगति
• निजी क्षेत्र की कमजोर भागीदारी
ECIL का अनुभव
• स्वदेशी कंप्यूटर विकसित किए।
• इलेक्ट्रॉनिक्स एवं नियंत्रण प्रणालियाँ विकसित कीं।
परिणाम:
• तकनीकी क्षमता संस्थानों तक सीमित रही।
• वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्योग विकसित नहीं हो सके।
सिम्प्यूटर (Simputer) का उदाहरण
• वर्ष 1998 में भारतीय नवप्रवर्तकों द्वारा विकसित किया गया।
• इसमें स्मार्टफोन जैसी कई विशेषताओं की पूर्व कल्पना थी।
चुनौतियाँ:
• वेंचर कैपिटल का अभाव
• सॉफ्टवेयर पारिस्थितिकी तंत्र की कमी
• आपूर्ति शृंखला का अभाव
• सीमित उपभोक्ता बाजार
परिणाम:
• वैश्विक सफलता बाद में iPhone जैसे स्मार्टफोनों को मिली।
विस्तार (Scaling) क्यों महत्वपूर्ण है?
नवाचार को सफल बनाने के लिए आवश्यक हैं:
• वेंचर कैपिटल
• विनिर्माण क्षमता
• आपूर्ति शृंखला पारिस्थितिकी तंत्र
• कुशल मानव संसाधन
• बाजार तक पहुँच
• वैश्विक ब्रांडिंग
यदि विस्तार नहीं हो:
• तकनीक केवल प्रोटोटाइप बनकर रह जाती है।
• नवाचार आर्थिक नेतृत्व में परिवर्तित नहीं हो पाता।
भारत के सफल मॉडल
औषधि उद्योग (Pharmaceutical Industry)
• वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
• “विश्व की फार्मेसी” के रूप में प्रसिद्ध।
• वैक्सीन उत्पादन में अग्रणी।
PARAM सुपरकंप्यूटर
• स्वदेशी कंप्यूटिंग क्षमता का प्रदर्शन।
• तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत किया।
आधार (Aadhaar) एवं UPI
• जनसंख्या स्तर पर तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित किए।
• विशाल डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया।
• दिखाया कि बड़े पैमाने पर विस्तार समाज को कैसे बदल सकता है।
भविष्य के विकास क्षेत्र
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI)
मुख्य फोकस:
• कम लागत वाले AI मॉडल
• ऊर्जा-कुशल कंप्यूटिंग
• बड़े पैमाने पर उपयोग
• जन-उपयोगी अनुप्रयोग
उपयोग के क्षेत्र:
• स्वास्थ्य
• कृषि
• शिक्षा
• सुशासन
क्वांटम कंप्यूटिंग
संभावित क्षेत्र:
• औषधि खोज
• जलवायु मॉडलिंग
• पदार्थ विज्ञान
• साइबर सुरक्षा
भारत को लागत कम करने और व्यावहारिक उपयोग पर ध्यान देना चाहिए।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
आधार:
• चंद्रयान
• मंगलयान
भविष्य के अवसर:
• अंतरिक्ष-आधारित कंप्यूटिंग
• क्वांटम संचार
• उपग्रह अवसंरचना
• AI-सक्षम अंतरिक्ष प्लेटफॉर्म
UPSC वैल्यू एडिशन
नवाचार से वैश्विक नेतृत्व का ढाँचा
अनुसंधान → प्रोटोटाइप → वित्तपोषण → विनिर्माण → बाजार → वैश्विक नेतृत्व
मुख्य सक्षम कारक
• वेंचर कैपिटल
• स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र
• सेमिकंडक्टर विनिर्माण
• कुशल मानव पूंजी
• अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश
• वैश्विक साझेदारियाँ
चुनौतियाँ
• R&D पर कम व्यय
• डीप-टेक वित्तपोषण तंत्र की कमजोरी
• आयातित तकनीकी घटकों पर निर्भरता
• अनुसंधान और व्यावसायीकरण के बीच अंतर
• सीमित वैश्विक तकनीकी ब्रांड
आगे की राह
• सार्वजनिक एवं निजी R&D निवेश में वृद्धि।
• सेमिकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
• डीप-टेक वेंचर कैपिटल को बढ़ावा देना।
• नवाचार से बाजार तक पहुँचने वाली प्रणालियों को सुदृढ़ करना।
• उद्योग–शिक्षा जगत सहयोग को प्रोत्साहित करना।
• वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
• आविष्कार के साथ-साथ व्यावसायीकरण पर भी समान ध्यान देना।
निष्कर्ष
भारत ने पहले ही विश्वस्तरीय वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। विकास के अगले चरण में नवाचारों को ऐसे वैश्विक उद्योगों में बदलना होगा जो आर्थिक शक्ति, तकनीकी नेतृत्व और रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान कर सकें।
स्मरणीय पंक्ति
“आविष्कार संभावनाएँ पैदा करता है, लेकिन विस्तार (Scale) ही उन्हें राष्ट्रीय शक्ति में बदलता है।”