The Hindu Editorial in Hindi
26 June 2026
भारत की जहाज़ बनाने की महत्वाकांक्षाओं को कोरिया के साथ नई गति मिल सकती है।
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
विषय: GS-3: इंफ्रास्ट्रक्चर | समुद्री अर्थव्यवस्था | मैन्युफैक्चरिंग, GS-2: भारत-दक्षिण कोरिया संबंध | आर्थिक कूटनीति
प्रसंग
- भारत और दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण (Shipbuilding) क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ बना रहे हैं।
- दक्षिण कोरिया के निवेश एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी भारत को अपने Maritime Vision के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं।
- संपादकीय का तर्क है कि दक्षिण कोरिया का अनुभव भारत को वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र (Global Shipbuilding Hub) बनने की दिशा में गति प्रदान कर सकता है।
जहाज निर्माण का महत्व
- विनिर्माण (Manufacturing) एवं निर्यात को बढ़ावा देता है।
- समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) को सुदृढ़ करता है।
- बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन करता है।
- बंदरगाह-आधारित विकास (Port-led Development) को प्रोत्साहित करता है।
- आपूर्ति शृंखलाओं (Supply Chains) एवं ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को मजबूत बनाता है।
भारत–दक्षिण कोरिया साझेदारी (India–South Korea Partnership)
प्रमुख सहयोग क्षेत्र
- जहाज निर्माण प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।
- डिजाइन एवं इंजीनियरिंग सहयोग।
- कार्यबल (Workforce) का कौशल विकास।
- समुद्री अनुसंधान एवं नवाचार।
- संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) एवं निजी निवेश।
प्रमुख घटनाक्रम
- कोचीन शिपयार्ड के साथ हुंडई (Hyundai) की साझेदारी।
- तमिलनाडु में हरित शिपयार्ड (Green Shipyard) में निवेश।
- सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज़ (Samsung Heavy Industries) का भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग।
- भारत में कोरियाई समुद्री उपकरण (Marine Equipment) पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार।
भारत को होने वाले लाभ (Benefits for India)
1. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- उन्नत जहाज निर्माण तकनीकों तक पहुँच।
- उत्पादन दक्षता में वृद्धि।
- बेहतर डिजाइन एवं इंजीनियरिंग क्षमता।
2. औद्योगिक विकास
- सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) का विकास।
- मजबूत घरेलू आपूर्ति शृंखला का निर्माण।
- समुद्री औद्योगिक क्लस्टरों का विकास।
3. रोजगार
- कुशल मानव संसाधन का विकास।
- जहाज निर्माण एवं मरम्मत क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर।
4. वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
- निर्यात में वृद्धि।
- आयात पर निर्भरता में कमी।
- वैश्विक समुद्री मूल्य शृंखलाओं (Global Maritime Value Chains) में एकीकरण।
प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges)
- उच्च पूंजीगत आवश्यकता।
- नीतिगत एवं नियामकीय अनिश्चितताएँ।
- कम लागत वाले दीर्घकालिक वित्त की सीमित उपलब्धता।
- कुशल मानव संसाधन की कमी।
- कमजोर सहायक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र।
- चीन, दक्षिण कोरिया एवं जापान से कड़ी प्रतिस्पर्धा।
आगे की राह (Way Forward)
- स्थिर नीतिगत एवं राजकोषीय समर्थन सुनिश्चित किया जाए।
- समुद्री कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए।
- जहाज निर्माण क्लस्टर एवं आपूर्तिकर्ता नेटवर्क विकसित किए जाएँ।
- सस्ती एवं दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- अनुसंधान, नवाचार तथा उद्योग–शिक्षा संस्थान सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- Maritime Vision 2030 एवं Maritime Amrit Kaal Vision 2047 के अंतर्गत निवेशों को शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
UPSC Value Addition
Maritime Vision 2030
- विश्वस्तरीय बंदरगाहों का विकास।
- जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्मत को बढ़ावा।
- तटीय अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण।
- लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार।
Maritime Amrit Kaal Vision 2047
लक्ष्य
- वर्ष 2030 तक विश्व के शीर्ष 10 जहाज निर्माण देशों में स्थान प्राप्त करना।
- वर्ष 2047 तक विश्व के शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होना।
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
निष्कर्ष
- दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञता भारत को अपने जहाज निर्माण उद्योग में व्यापक परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
- सफलता सतत सुधारों, प्रौद्योगिकी अपनाने, कुशल मानव संसाधन के विकास तथा मजबूत घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर निर्भर करेगी।