The Hindu Editorial in Hindi
10 July 2026
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच मज़बूत साझेदारी बनाना
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
Topic: विषय: GS2 – द्विपक्षीय संबंध; रणनीतिक साझेदारी
समाचार में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा सहयोग तथा लचीली आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े नए समझौतों के माध्यम से और सुदृढ़ किया गया।
प्रमुख बिंदु
• भारत और ऑस्ट्रेलिया ने व्यापक सामरिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
• दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (Joint Declaration on Defence and Security Cooperation) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की Maritime Border Command और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी शामिल है।
• दोनों देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने हेतु भारत–ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप (India–Australia Maritime Security Collaboration Roadmap) को अपनाया।
• SHANTI अधिनियम के अंतर्गत किए गए सुधारों के बाद भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम निर्यात को लागू किया गया, जिससे स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बल मिला।
• दोनों देशों ने Australia–India Partnership on Cyber, Critical Technologies and Supply Chains (PACTS) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य सुरक्षित एवं लचीले प्रौद्योगिकी तंत्र का निर्माण करना है।
• यात्रा ने इस आवश्यकता को रेखांकित किया कि सामरिक समानताओं (Strategic Convergence) को व्यापार, प्रौद्योगिकी, समुद्री सहयोग और प्रवासी भारतीय समुदाय के माध्यम से दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी में बदला जाए।
मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा : सामरिक साझेदारी को नई गति
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा ने उच्चस्तरीय बैठकों तथा व्यापक सहयोग एजेंडा के माध्यम से भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों को और मजबूत किया।
• बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ऑस्ट्रेलिया भारत को आर्थिक विविधीकरण का प्रमुख साझेदार मानता है।
• यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीय कार्यक्रम, शीर्ष नेतृत्व की बैठकें तथा अनेक रणनीतिक क्षेत्रों में समझौते हुए।
• ऑस्ट्रेलिया का नया आर्थिक रोडमैप तथा नियमित मंत्रीस्तरीय संवाद भारत के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
• ऑस्ट्रेलिया में भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, जिससे सरकार बदलने पर भी संबंधों में निरंतरता बनी रहती है।
सामरिक समानता से सामरिक संरेखण की ओर
सामरिक समानता (Strategic Convergence)
• जब दो देशों के हित एवं प्राथमिकताएँ समान हों।
सामरिक संरेखण (Strategic Alignment)
• जब समान हितों को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत व्यवस्था, नीतिगत समन्वय तथा व्यावहारिक सहयोग विकसित किया जाए।
भारत और ऑस्ट्रेलिया—
• वैश्विक अनिश्चितताओं एवं क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं।
• व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा एवं रक्षा के क्षेत्र में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहते हैं।
• अब आवश्यकता साझा हितों को स्थायी संस्थागत तंत्र में बदलने की है।
• दीर्घकालिक सामरिक संरेखण केवल राजनीतिक सद्भावना से नहीं, बल्कि नियमित सहयोग, पारस्परिक संचालन क्षमता (Interoperability) और नीतिगत समन्वय से संभव होगा।
रक्षा, समुद्री एवं प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार
• रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा के माध्यम से सामरिक संबंधों को और मजबूत किया गया।
• ऑस्ट्रेलिया की Maritime Border Command तथा भारतीय तटरक्षक बल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
• भारत–ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अपनाया गया।
• SHANTI अधिनियम के तहत परमाणु दायित्व ढाँचे में सुधारों के बाद ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम निर्यात को लागू किया गया।
• PACTS पहल के माध्यम से साइबर सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति शृंखला सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
• ये सभी पहल भारत की सामरिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए साझेदारी के क्रमिक संस्थानीकरण (Institutionalisation) को दर्शाती हैं।
साझेदारी को गहरा करने की चुनौतियाँ
• सामरिक इरादों को वास्तविक परिचालन सहयोग (Operational Cooperation) में बदलना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
• ऑस्ट्रेलिया की रक्षा प्राथमिकताएँ मुख्यतः पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित हैं, जबकि भारत को स्थलीय एवं समुद्री दोनों सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
• आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के बाद व्यापार बढ़ा है, फिर भी सीमित जागरूकता के कारण लघु एवं मध्यम उद्यम (SMEs) अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाए हैं।
• बढ़ते द्विपक्षीय विश्वास के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में भारत के सामरिक महत्व को लेकर जन-जागरूकता अभी भी सीमित है।
• संस्थागत, आर्थिक एवं जन-जागरूकता से जुड़े इन अंतरालों को दूर करना आवश्यक है।
प्रवासी भारतीय समुदाय : भविष्य की सामरिक संपदा
• भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई आज ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय बन चुके हैं।
• यह समुदाय शिक्षा, नवाचार, व्यापार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।
• इस क्षमता का संस्थागत उपयोग कर ऑस्ट्रेलियाई MSMEs को भारतीय बाजार तथा भारतीय MSMEs को ऑस्ट्रेलियाई बाजार तक पहुँच प्रदान की जा सकती है।
• कुशल पेशेवरों की अधिक गतिशीलता आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को और मजबूत करेगी।
• प्रवासी समुदाय की सद्भावना को दीर्घकालिक आर्थिक एवं संस्थागत साझेदारी में बदलना दोनों देशों के सामरिक संबंधों को स्थायी आधार प्रदान करेगा।
निष्कर्ष
भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंध साझा सामरिक हितों से आगे बढ़कर संस्थागत सहयोग की दिशा में विकसित हो रहे हैं। इस गति को बनाए रखने के लिए गहन आर्थिक एकीकरण, समुद्री सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा जन-से-जन संपर्क को और मजबूत करना आवश्यक है। यदि दोनों देश सामरिक समानताओं को मजबूत संस्थागत ढाँचों एवं व्यावहारिक सहयोग में परिवर्तित करने में सफल होते हैं, तो वे स्वतंत्र, लचीले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं।
वर्णनात्मक प्रश्न (15 अंक | 250 शब्द)
प्रश्न:
“भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंध सामरिक समानता (Strategic Convergence) से सामरिक संरेखण (Strategic Alignment) की ओर विकसित हो रहे हैं। हालिया द्विपक्षीय घटनाक्रमों तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संदर्भ में इसके महत्व की विवेचना कीजिए।”