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आखिरकार: भारत का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

(Source – The Hindu, International Edition, Page no.-10 )

विषय : GS3 – ऊर्जा अवसंरचना; नीतिगत सुधार

प्रसंग

भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, इसमें देरी, लागत वृद्धि और नियामकीय चिंताओं ने इसकी दक्षता और भविष्य की नीति दिशा पर प्रश्न खड़े किए हैं।

मुख्य बिंदु

  • प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त कर भारत दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है
  • परियोजना में 16 वर्ष की देरी और लागत ₹8,000 करोड़ से अधिक
  • प्रयुक्त ईंधन और अवशिष्ट यूरेनियम से प्लूटोनियम उत्पादन
  • वर्तमान में परमाणु ऊर्जा का योगदान लगभग 3%
  • ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन दक्षता में लाभ
  • नियामकीय पारदर्शिता और आर्थिक व्यवहार्यता पर प्रश्न

सावधानी के साथ उपलब्धि

  • यह भारत की तकनीकी क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत है
  • साथ ही, यह प्रशासनिक और प्रबंधन की कमियों को भी दर्शाता है

देरी और लागत वृद्धि की समस्या

  • लागत ₹8,181 करोड़ तक बढ़ी
  • लगभग 16 वर्षों की देरी
  • कारण:
    • कमजोर योजना
    • खरीद में अक्षमता
    • निगरानी की कमी
  • जवाबदेही का अभाव

परमाणु कार्यक्रम में रणनीतिक भूमिका

  • यह तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण का प्रमुख हिस्सा है
  • प्रयुक्त ईंधन से प्लूटोनियम उत्पादन
  • दीर्घकालिक लक्ष्य: थोरियम आधारित रिएक्टर
  • भारत के थोरियम संसाधनों का उपयोग

लाभ और उभरती चिंताएँ

लाभ:

  • उच्च ईंधन दक्षता
  • कम भूमि आवश्यकता
  • ऊर्जा सुरक्षा में योगदान

चिंताएँ:

  • कुल बिजली उत्पादन में कम योगदान
  • सौर और पवन ऊर्जा की घटती लागत से प्रतिस्पर्धा
  • आर्थिक व्यवहार्यता पर प्रश्न

आगे की राह और सुधार

  • पारदर्शिता और प्रदर्शन मूल्यांकन सुनिश्चित करना
  • भविष्य की परियोजनाओं में सीखों का उपयोग
  • नियामकीय संस्थाओं की स्वतंत्रता बढ़ाना
  • निगरानी तंत्र को मजबूत करना
  • लागत-प्रभावशीलता और स्थिरता पर ध्यान देना

निष्कर्ष

यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति में प्रगति को दर्शाती है, लेकिन साथ ही योजना और क्रियान्वयन की कमजोरियों को उजागर करती है।

भविष्य में परमाणु ऊर्जा विस्तार को आर्थिक व्यवहार्यता, पारदर्शिता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।


वर्णनात्मक प्रश्न (250 शब्द, 15 अंक)

प्रश्न: “भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के महत्व की चर्चा कीजिए। इनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा एक सतत परमाणु नीति के लिए सुधार सुझाइए।”


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