The Hindu Editorial Analysis in Hindi
31 March 2026
परिसीमन के अंतर्गत संघवाद सुनिश्चित करना
(Source – The Hindu, International Edition, Page no.-10 )
Topic : GS 2: संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ
समसामयिक संदर्भ
2026 के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया ने भारत में प्रतिनिधित्व, जनसंख्या असमानता और संघीय संतुलन को लेकर बहस को पुनर्जीवित कर दिया है। यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए या इसमें जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को भी शामिल किया जाना चाहिए।

परिचय
परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 81 में निहित है। परंतु वर्तमान में राज्यों के बीच जनसंख्या वृद्धि और प्रजनन दर में व्यापक अंतर ने इस सिद्धांत के समक्ष नई चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी हैं।
जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व का महत्व
- लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है — “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य”
- जनसंख्या के अनुपात में सीटें तय करना प्रतिनिधित्व की समानता सुनिश्चित करता है
- संसदीय वैधता और जवाबदेही इसी सिद्धांत पर आधारित है
संघीय न्याय की आवश्यकता
- विभिन्न राज्यों में प्रजनन दर और जनसंख्या वृद्धि असमान है
- दक्षिणी और कुछ पश्चिमी राज्यों ने शीघ्र जनसंख्या नियंत्रण प्राप्त किया
- जबकि कुछ उत्तरी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि अधिक बनी रही
समस्या:
यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया जाए, तो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को प्रतिनिधित्व में नुकसान हो सकता है
परिसीमन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ
- राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व असंतुलन बढ़ने की आशंका
- उत्तर–दक्षिण विभाजन (क्षेत्रीय तनाव) की संभावना
- जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों के प्रति नकारात्मक प्रोत्साहन
- संघीय ढाँचे में असंतुलन
जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को शामिल करने का प्रस्ताव
- सीट आवंटन में “जनसांख्यिकीय प्रदर्शन” को शामिल करने का सुझाव
- यह दृष्टिकोण वित्त आयोग की तर्ज पर आधारित है
संभावित मानदंड:
- जनसंख्या नियंत्रण की शीघ्र उपलब्धि
- प्रजनन दर में कमी की गति
लाभ:
- बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन
- सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व
- क्षेत्रीय असंतोष में कमी
संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
- जनसंख्या को प्रमुख आधार बनाए रखना आवश्यक
- साथ ही, संघीय न्याय के लिए सहायक मानदंडों को शामिल करना
- लोकसभा की सीटों की संख्या को व्यावहारिक सीमा (जैसे ~700) तक रखना
आगे की राह
- पारदर्शी और सहमति-आधारित परिसीमन प्रक्रिया
- संघ और राज्यों के बीच संवाद को बढ़ाना
- जनसंख्या नियंत्रण और सुशासन को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ
- प्रतिनिधित्व और दक्षता के बीच संतुलन
निष्कर्ष
भारत में परिसीमन केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संघीय लोकतंत्र की कसौटी है।
जहाँ जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व आवश्यक है, वहीं संघीय न्याय भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एक संतुलित दृष्टिकोण—जिसमें जनसंख्या के साथ जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को भी महत्व दिया जाए—न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम करेगा, बल्कि सुशासन और राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करेगा।