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The Hindu Editorial in Hindi

30 June 2026

सुधार 3.0 — भारत की विकास दर की ओर

(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)

विषय: GS-3: अर्थव्यवस्था | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस | इनोवेशन | डिजिटल अर्थव्यवस्था

Context

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आर्थिक परिवर्तन का अगला प्रमुख चालक बनकर उभर रही है।

संपादकीय का तर्क है कि भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता को दोहराते हुए एक सुलभ, किफायती एवं संप्रभु (Sovereign) AI पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना चाहिए।

Core Idea

भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

• ओपन-सोर्स AI
• किफायती AI कंप्यूट क्षमता (AI Compute)
• स्वदेशी AI अवसंरचना
• सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP)
• शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए AI की व्यापक उपलब्धता

Key Reform Areas

Affordable AI Access (सुलभ एवं किफायती AI उपलब्धता)

• विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को कम लागत पर AI टोकन उपलब्ध कराना।
• विश्वविद्यालयों एवं विद्यालयों में AI की पहुँच का विस्तार करना।
• AI को एक सार्वजनिक डिजिटल संसाधन (Public Digital Resource) के रूप में विकसित करना।

Sovereign AI Infrastructure (संप्रभु AI अवसंरचना)

• देश में AI कंप्यूट क्षमता का विकास करना।
• स्वदेशी डेटा केंद्र (Data Centres) स्थापित करना।
• विदेशी AI प्लेटफ़ॉर्मों पर निर्भरता कम करना।

Open AI Ecosystem (खुला AI पारिस्थितिकी तंत्र)

• ओपन-सोर्स AI मॉडलों को प्रोत्साहित करना।
• साझा AI अवसंरचना के माध्यम से स्टार्टअप्स को सहयोग देना।
• प्रवेश बाधाओं को कम कर नवाचार को बढ़ावा देना।

Public–Private Partnerships (सार्वजनिक–निजी भागीदारी)

• वैश्विक क्लाउड सेवा प्रदाताओं के साथ सहयोग बढ़ाना।
• निजी निवेश के माध्यम से AI अवसंरचना का विस्तार करना।
• महत्वपूर्ण डिजिटल परिसंपत्तियों पर रणनीतिक नियंत्रण सुनिश्चित करना।

Challenges (चुनौतियाँ)

• अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर कम व्यय।
• आयातित AI हार्डवेयर पर निर्भरता।
• उन्नत कंप्यूटिंग अवसंरचना की उच्च लागत।
• विक्रेता-निर्भरता (Vendor Lock-in) का जोखिम।
• सीमित स्वदेशी सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता।

UPSC Value Addition

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के प्रमुख उदाहरण:

• आधार (Aadhaar)
• यूपीआई (UPI)
• डिजिलॉकर (DigiLocker)

• AI भी DPI की तरह एक रणनीतिक सार्वजनिक अवसंरचना बन सकता है।

AI के विकास में निम्नलिखित के बीच संतुलन आवश्यक है:

• नवाचार
• डिजिटल संप्रभुता
• राष्ट्रीय सुरक्षा
• आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता

Way Forward (आगे की राह)

• AI अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना।
• स्वदेशी सेमीकंडक्टर एवं AI कंप्यूट पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।
• सार्वजनिक उपयोग हेतु ओपन-सोर्स AI को बढ़ावा देना।
• शैक्षणिक संस्थानों में AI कौशल विकास को सुदृढ़ करना।
• दीर्घकालिक राष्ट्रीय AI रणनीति विकसित करना।

Conclusion (निष्कर्ष)

भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण केवल AI को अपनाने पर नहीं, बल्कि एक किफायती, संप्रभु और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर निर्भर करेगा, जो बड़े पैमाने पर नवाचार को गति प्रदान कर सके।


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