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The Hindu Editorial 04 July 2026 in Hindi

न्याय का निर्माण

(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)

Topic: विषय: GS 2: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली

संदर्भ

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक दिवाला (Insolvency) मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से उत्पन्न काल्पनिक (फर्जी) न्यायिक उद्धरणों (Legal Citations) पर भरोसा करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने न्यायिक प्रक्रिया में AI के उपयोग हेतु कड़े सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य बिंदु

AI Hallucinations (एआई हैल्युसिनेशन)

• सर्वोच्च न्यायालय ने AI द्वारा उत्पन्न फर्जी कानूनी उद्धरणों की तुलना भोपाल गैस त्रासदी से की।
• न्यायालय ने कहा कि ये अदृश्य, अत्यंत हानिकारक तथा गंभीर न्यायिक अन्याय का कारण बन सकते हैं।

हालिया निर्णय

• सर्वोच्च न्यायालय ने NCLT एवं राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के आदेशों को निरस्त कर दिया।
• कारण यह था कि दोनों मंचों ने AI द्वारा उत्पन्न काल्पनिक न्यायिक निर्णयों (Fake Case Laws) पर भरोसा किया था।

AI की सीमित भूमिका

• AI का उपयोग केवल निम्न कार्यों में सहायक उपकरण (Assistive Tool) के रूप में किया जा सकता है—
• विधिक अनुसंधान (Legal Research)
• प्रशासनिक कार्य
• वाद प्रबंधन (Case Management)

• AI निम्न कार्यों का स्थान नहीं ले सकता—
• न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning)
• न्यायिक विवेक (Judicial Discretion)
• संवैधानिक एवं व्यावसायिक उत्तरदायित्व (Accountability)

न्यायालयों के लिए मसौदा AI विनियम, 2026

प्रस्तावित “न्यायालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग संबंधी विनियम, 2026” के अनुसार AI को निम्न कार्यों से प्रतिबंधित किया गया है—

• न्यायिक निर्णय (Adjudication) देना।
• दंड निर्धारित करना।
• जमानत संबंधी निर्णय लेना।
• पक्षकारों एवं गवाहों की विश्वसनीयता का आकलन करना।

• यह मसौदा वर्तमान में सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) के लिए उपलब्ध है।

सर्वोच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

• न्यायिक निर्णय कभी भी AI द्वारा निर्मित काल्पनिक सामग्री पर आधारित नहीं होने चाहिए।
• AI से प्रभावित ऐसा कोई निर्णय विधि की दृष्टि में वैध नहीं माना जाएगा।
• AI केवल निर्णय प्रक्रिया में सहायक हो सकता है, निर्णयकर्ता नहीं।

व्यावसायिक उत्तरदायित्व

न्यायालय ने कहा कि—

• AI द्वारा उत्पन्न अप्रमाणित निर्णयों का हवाला देना अधिवक्ताओं के लिए व्यावसायिक दुराचार (Professional Misconduct) है।
• ऐसे मामलों में न्यायाधीशों द्वारा उचित सत्यापन न करना गंभीर कर्तव्य-लोप (Dereliction of Duty) माना जाएगा।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह एक समिति गठित करे, जो—

• AI के उपयोग हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करे।
• अप्रमाणित AI सामग्री का उपयोग करने वाले अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान करे।

निष्कर्ष

कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक अनुसंधान, वाद प्रबंधन तथा प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, किंतु यह मानवीय निर्णय, नैतिक विवेक तथा संवैधानिक उत्तरदायित्व का विकल्प नहीं बन सकती। सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियाँ इस बात को रेखांकित करती हैं कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुदृढ़ नियामकीय ढाँचे, व्यावसायिक उत्तरदायित्व तथा प्रभावी मानवीय निगरानी को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

वर्णनात्मक प्रश्न

प्र. “कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक दक्षता में सुधार कर सकती है, किंतु AI पर अनियंत्रित निर्भरता न्याय वितरण प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करती है।” न्यायालयों में AI के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

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