The Hindu Editorial in Hindi
07 July 2026
पीछे गिरना
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
विषय: GS 1: महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ जैसे मानसून
संदर्भ
भारी मानसूनी वर्षा के कारण मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भीषण बाढ़ आई, जिससे परिवहन सेवाएँ बाधित हुईं, भूस्खलन, अवसंरचनात्मक क्षति तथा जनहानि हुई। इस घटना ने जलवायु परिवर्तन, शहरी बाढ़ तथा शहरी शासन (Urban Governance) से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को उजागर किया।
प्रमुख तथ्य
- सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मानसून तथा नमी से भरपूर दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण कोंकण तट और मुंबई में अत्यधिक वर्षा हुई।
- ऊँची ज्वार (High Tide) तथा क्षमता से अधिक भार झेल रही जल-निकासी प्रणाली के कारण जलभराव और शहरी बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।
- बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण रेलवे, एक्सप्रेसवे तथा हवाई सेवाएँ प्रभावित हुईं।
- जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण तथा समुद्री तटीय भूमि के पुनर्भरण (Land Reclamation) ने मुंबई की बाढ़-प्रवणता बढ़ा दी है।
- अधूरी जल-निकासी परियोजनाओं तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी ने शासन संबंधी कमजोरियों को उजागर किया।
भारी वर्षा के कारण
सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मानसून
- नमी से भरपूर दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने पश्चिमी भारत में अत्यधिक वर्षा कराई।
पश्चिमी घाट का प्रभाव
- पश्चिमी घाट ने आर्द्र हवाओं को ऊपर उठने के लिए बाध्य किया, जिससे कोंकण तट पर तीव्र वर्षा हुई।
अपतटीय (Offshore) मौसम प्रणालियाँ
- अपतटीय मौसम प्रणालियों ने अतिरिक्त नमी को मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों की ओर प्रवाहित किया।
अल्प अवधि में अत्यधिक वर्षा
- कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से लंबे समय तक होने वाली सामान्य वर्षा की तुलना में अधिक शहरी बाढ़ उत्पन्न हुई।
ऊँची ज्वार (High Tide)
- ऊँची ज्वार के कारण वर्षाजल की निकासी बाधित हुई, जिससे जलभराव बढ़ गया।
भारी वर्षा के प्रभाव
शहरी बाढ़
- अल्प समय में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण वर्षा जल निकासी प्रणाली (Stormwater Drains) अपनी क्षमता से अधिक भार वहन नहीं कर सकी।
नदियों में बाढ़
- महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों, विशेषकर नासिक के नदी जलग्रहण क्षेत्र, जल से भर गए।
परिवहन बाधित
- रेलवे, हवाई सेवाएँ तथा प्रमुख राजमार्ग बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए।
अवसंरचना को नुकसान
- भोर घाट में भूस्खलन के कारण मुंबई–पुणे रेल सेवाएँ बाधित हुईं तथा संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई।
जनहानि
- मानखुर्द क्षेत्र में एक चॉल गिरने से पाँच बच्चों की मृत्यु हो गई।
मुंबई की संरचनात्मक कमजोरियाँ
पुनर्भरित भूमि (Reclaimed Land)
- मुंबई का बड़ा भाग पुनर्भरित भूमि, दलदली क्षेत्रों, ज्वारीय मैदानों तथा निम्न-स्थित तटीय क्षेत्रों पर विकसित हुआ है।
बाढ़-प्रवण भौगोलिक स्थिति
- ऊँची ज्वार और भारी वर्षा एक साथ होने पर बाढ़ का जोखिम स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
अव्यवस्थित शहरीकरण
- अनियोजित विकास के कारण भूजल पुनर्भरण घटा तथा सतही अपवाह (Surface Runoff) बढ़ गया।
अपर्याप्त जल-निकासी प्रणाली
- वर्तमान जल-निकासी प्रणाली अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक जल प्राप्त कर रही है।
रैखिक अवसंरचना की संवेदनशीलता
- बाढ़ ने राजमार्गों, रेलवे तथा एक्सप्रेसवे जैसी अवसंरचनाओं की कमजोरियों को उजागर किया।
शासन एवं अवसंरचना संबंधी चुनौतियाँ
अधूरी बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएँ
- BRIMSTOWAD (Brihanmumbai Storm Water Drain Project) की अनेक जल-निकासी परियोजनाएँ अभी तक पूर्ण नहीं हुई हैं।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- वर्तमान जल-निकासी प्रणाली पुराने मानसूनी पैटर्न के आधार पर डिज़ाइन की गई थी, जो वर्तमान जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।
अपर्याप्त तैयारी
- मानसून पूर्व नालों की सफाई के बावजूद जलभराव, पेड़ों का गिरना, भवनों का ढहना और परिवहन बाधित होना तैयारी की कमी को दर्शाता है।
संस्थागत समन्वय की कमी
- BMC, IMD, NDRF, रेलवे, राज्य सरकार तथा राजमार्ग प्राधिकरणों के बीच समन्वय का अभाव रहा।
विलंबित प्रशासनिक प्रतिक्रिया
- जोखिमपूर्ण निर्माण कार्य रोकने संबंधी निर्देश बड़े नुकसान के बाद जारी किए गए।
प्रमुख सीख एवं आगे की राह
शहरी नियोजन में सुधार
- जल-अवशोषण क्षमता बढ़ाने तथा बाढ़-रोधी अवसंरचना विकसित करने पर बल दिया जाए।
जल-निकासी प्रणाली का आधुनिकीकरण
- बढ़ती तीव्र वर्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं अधिक क्षमता वाली जल-निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।
जलवायु अनुकूल अवसंरचना
- अवसंरचना निर्माण एवं आपदा प्रबंधन में जलवायु परिवर्तन के अनुमानों को शामिल किया जाए।
संस्थागत समन्वय को मजबूत करना
- स्थानीय निकायों, परिवहन एजेंसियों तथा आपदा प्रबंधन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय दृष्टिकोण
- आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण एवं समयबद्ध अवसंरचना उन्नयन पर ध्यान दिया जाए।
UPSC Value Addition
प्रमुख चुनौतियाँ
- जलवायु परिवर्तन
- अनियोजित शहरीकरण
- तटीय भूमि का पुनर्भरण
- अपर्याप्त जल-निकासी
- संस्थागत समन्वय की कमी
प्रमुख पहल
- BRIMSTOWAD परियोजना
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन तंत्र (NDRF)
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
- शहरी जलवायु अनुकूलन (Urban Climate Resilience)
निष्कर्ष
मुंबई की हालिया बाढ़ यह दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जबकि शहरी अवसंरचना उनकी गति के अनुरूप विकसित नहीं हो पाई है। भविष्य में सुरक्षित एवं लचीला (Resilient) शहर बनाने के लिए जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन, आधुनिक जल-निकासी प्रणाली, प्राकृतिक आर्द्रभूमियों का संरक्षण, संस्थागत समन्वय तथा प्रतिक्रियात्मक के स्थान पर सक्रिय आपदा प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।