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The Hindu Editorial in Hindi

14 July 2026

The Making of Israel’s Retreat into Isolation

(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)

विषय: GS 3 (ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा) · GS 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, रणनीतिक प्रौद्योगिकी, शासन)

संदर्भ

संपादकीय का तर्क है कि भारत को परमाणु ऊर्जा क्षमता का तीव्र विस्तार करना चाहिए, साथ ही अपनी अर्जित तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा उत्कृष्ट परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड को भी बनाए रखना चाहिए।

सरकार द्वारा वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किए जाने के संदर्भ में, प्राथमिकता स्वदेशी प्रौद्योगिकी, चरणबद्ध निजी भागीदारी तथा कठोर सुरक्षा मानकों पर होनी चाहिए, न कि आयातित रिएक्टर तकनीकों पर अत्यधिक निर्भरता पर।

मुद्दा संक्षेप में

• दशकों तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित किया है।
• परमाणु क्षेत्र में नए सार्वजनिक एवं निजी भागीदारों के प्रवेश से क्षमता विस्तार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ मजबूत नियामकीय निगरानी तथा उच्चतम सुरक्षा मानकों की आवश्यकता भी बढ़ गई है।
• दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) तथा स्वदेशी रिएक्टर प्रौद्योगिकियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

स्थिर पृष्ठभूमि

• वर्ष 1974 में भारत के शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण के बाद परमाणु ईंधन एवं प्रौद्योगिकी तक पहुँच पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए।
• भारत–अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता (2008) के बाद असैनिक परमाणु सहयोग पर अधिकांश प्रतिबंध समाप्त हो गए।

भारत का त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

चरण-I

• प्राकृतिक यूरेनियम आधारित दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactors–PHWRs)

चरण-II

• प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Fast Breeder Reactors–FBRs)

चरण-III

• भारत के प्रचुर थोरियम भंडार पर आधारित थोरियम रिएक्टर

भारत के परमाणु कार्यक्रम का नेतृत्व

• परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE)
• न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL)
• भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI)
• परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC)

मुख्य आयाम

स्वदेशी परमाणु क्षमता

• अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने भारत को स्वदेशी रिएक्टर प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
• आज भारत अधिकांश रिएक्टर घटकों का डिज़ाइन, निर्माण एवं संचालन स्वयं करता है।

स्वदेशी PHWR प्रौद्योगिकी का विकास

• 200 मेगावाट
• 220 मेगावाट
• 540 मेगावाट
• 700 मेगावाट रिएक्टर

• भारत ने 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रथम प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का भी सफल विकास किया है, जो उसकी तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है।

लागत प्रतिस्पर्धात्मकता

• स्वदेशी PHWR विश्व के सबसे कम लागत वाले परमाणु रिएक्टरों में शामिल हैं।
• घरेलू विनिर्माण ने आयातित रिएक्टरों की तुलना में पूंजीगत लागत को काफी कम किया है।
• स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है तथा तकनीकी निर्भरता घटाती है।

परमाणु क्षमता का विस्तार

• भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

इसके लिए आवश्यक है—

• निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी
• परियोजनाओं का तीव्र क्रियान्वयन
• स्थिर निवेश ढाँचा
• घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs)

SMRs के प्रमुख लाभ

• कम प्रारंभिक पूंजी निवेश
• मॉड्यूलर निर्माण
• शीघ्र स्थापना
• AI डेटा सेंटर एवं औद्योगिक क्लस्टरों के लिए विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति

• भारत स्वदेशी SMR विकसित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकियों का भी सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है।

तकनीकी आत्मनिर्भरता

• वर्तमान में भारत PHWR प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों में शामिल है।

भविष्य की प्राथमिकताएँ

• स्वदेशी लाइट वाटर रिएक्टर (LWR)
• उन्नत ईंधन चक्र प्रौद्योगिकी
• यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) तकनीक
• फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम का विस्तार

• आयातित परमाणु तकनीकों पर निर्भरता कम करने से दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी।

सुरक्षा संबंधी पहलू

• भारत का परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड अत्यंत संतोषजनक रहा है।

क्षमता विस्तार के दौरान निम्नलिखित से कोई समझौता नहीं होना चाहिए—

• नियामकीय स्वतंत्रता
• मजबूत सुरक्षा संस्कृति
• नियमित निरीक्षण
• प्रशिक्षित एवं कुशल मानव संसाधन

• नए प्रतिभागियों को बड़े स्तर पर विस्तार से पूर्व अपनी परिचालन क्षमता सिद्ध करनी होगी।

आलोचनात्मक विश्लेषण

सकारात्मक पक्ष

• सिद्ध एवं विश्वसनीय स्वदेशी रिएक्टर प्रौद्योगिकी।
• प्रतिस्पर्धी निर्माण लागत।
• मजबूत घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र।
• परमाणु ऊर्जा के माध्यम से दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा।
• नेट ज़ीरो एवं निम्न-कार्बन विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान।
• नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण हेतु विश्वसनीय बेसलोड बिजली उपलब्ध कराना।

चुनौतियाँ

• उच्च प्रारंभिक पूंजी निवेश।
• लंबी निर्माण अवधि।
• सीमित घरेलू यूरेनियम भंडार।
• वैश्विक परमाणु दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा संबंधी जन-चिंताएँ।
• SMR प्रौद्योगिकी अभी विश्व स्तर पर पूर्णतः व्यावसायिक नहीं हुई है।
• निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए स्पष्ट नियामकीय ढाँचा एवं दायित्व (Liability) संबंधी स्पष्टता आवश्यक है।

आगे की राह

• विभिन्न स्थलों पर स्वदेशी 700 मेगावाट PHWR की त्वरित स्थापना की जाए।
• स्वदेशी लाइट वाटर रिएक्टर तथा उन्नत ईंधन चक्र प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए।
• चरणबद्ध तरीके से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) विकसित किए जाएँ।
• कठोर नियामकीय निगरानी बनाए रखते हुए उत्तरदायी निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
• परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू विनिर्माण एवं स्थानीयकरण को सुदृढ़ किया जाए।
• परमाणु सुरक्षा, कुशल मानव संसाधन तथा स्वतंत्र नियामक संस्थाओं में निरंतर निवेश किया जाए।
• परमाणु ऊर्जा को भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति तथा नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य के साथ समेकित किया जाए।


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