The Hindu Editorial in Hindi
23 July 2026
भारत को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा में नेतृत्व करना चाहिए
(Source – The Hindu, Editorial Page no. – 8)
विषय: GS 2 (भारत एवं उसका पड़ोस, अंतरराष्ट्रीय संबंध, समुद्री सुरक्षा) · GS 3 (आंतरिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, हिंद महासागर क्षेत्र)
समाचार में क्यों:
• पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों द्वारा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Strait of Bab el-Mandeb) से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकियों ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है।
• यह जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री चोक-पॉइंट्स (Maritime Chokepoints) में से एक है।
• भारत का व्यापार एवं ऊर्जा आयात इस समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है।
• ऐसे में भारत के लिए लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका निभाना आवश्यक माना जा रहा है.
मुख्य विवरण
• बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) तथा हिंद महासागर (Indian Ocean) से जोड़ता है।
• भारत के लगभग एक-तिहाई व्यापार का आवागमन इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होता है।
• हूती विद्रोहियों की नई धमकियाँ वैश्विक नौवहन (Shipping) को बाधित कर सकती हैं तथा मालभाड़ा एवं समुद्री बीमा लागत बढ़ा सकती हैं।
• भारत की अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा सुरक्षा लाल सागर के सुरक्षित समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भर है।
• वर्तमान परिस्थिति भारत को समुद्री सुरक्षा में अधिक सक्रिय नेतृत्व निभाने का अवसर प्रदान करती है.
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
• यह जलडमरूमध्य यूरोप, एशिया एवं अफ्रीका को जोड़ने वाले विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोक-पॉइंट्स में से एक है।
• यह स्वेज़ नहर (Suez Canal) का प्रवेश द्वार (Gateway) है, जो विश्व के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में शामिल है।
• यदि यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) के रास्ते जाना पड़ता है, जिससे यात्रा अवधि एवं परिवहन लागत दोनों बढ़ जाते हैं।
• यह मार्ग भारत के यूरोप, उत्तरी अफ्रीका एवं भूमध्यसागरीय (Mediterranean) देशों के साथ व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
• सुरक्षित समुद्री मार्ग (Sea Lanes) वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं एवं ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं.
वर्ष 2024 के लाल सागर संकट से मिले सबक
• गाज़ा संघर्ष के दौरान हूती बलों ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए।
• सुरक्षा चिंताओं के कारण अनेक शिपिंग कंपनियों ने स्वेज़ नहर मार्ग का उपयोग बंद कर वैकल्पिक मार्ग अपनाया।
• मालभाड़ा, समुद्री बीमा प्रीमियम तथा पारगमन समय (Transit Time) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
• भारतीय व्यापारी जहाजों एवं भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
• इस संकट ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक समुद्री व्यापार को आसानी से प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए निहितार्थ
• बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत के विदेशी व्यापार एवं ऊर्जा आयात को सीधे प्रभावित करता है।
• लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है तथा भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है।
• भारतीय शिपिंग कंपनियों एवं हजारों भारतीय नाविकों के समक्ष परिचालन संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।
• लंबे समय तक अस्थिरता रहने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ एवं औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।
• समुद्री सुरक्षा अब भारत की आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य अंग बन चुकी है।
भारत के समुद्री नेतृत्व की आवश्यकता
• भारत को प्रतिक्रियात्मक (Reactive) दृष्टिकोण के बजाय सक्रिय (Proactive) रणनीति अपनानी चाहिए।
• पश्चिमी हिंद महासागर (Western Indian Ocean) में नौसैनिक उपस्थिति को मजबूत कर क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाई जा सकती है।
• फ्रांस एवं जापान जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग समुद्री निगरानी एवं प्रतिरोध क्षमता (Deterrence) को मजबूत करेगा।
• भारत वास्तविक समय समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) के लिए सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (Information Fusion Centre–Indian Ocean Region-IFC-IOR) का प्रभावी उपयोग कर सकता है।
• सक्रिय भागीदारी भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) की परिकल्पना को सशक्त बनाएगी।
क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
• समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय एवं बाह्य-क्षेत्रीय (Extra-Regional) देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।
• भारत को मिस्र (Egypt), सऊदी अरब (Saudi Arabia) तथा अन्य तटीय देशों के साथ रचनात्मक सहयोग बढ़ाना चाहिए ताकि नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित की जा सके।
• संयुक्त नौसैनिक अभ्यास एवं समन्वित गश्त (Coordinated Patrols) परिचालन तैयारी को मजबूत करेंगे।
• अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा होना चाहिए, न कि सैन्य तनाव को बढ़ाना।
• नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था (Rules-Based Maritime Order) को सुदृढ़ करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
• पश्चिम एशिया का जारी संघर्ष समुद्री सुरक्षा के लिए निरंतर अनिश्चितता उत्पन्न कर रहा है।
• महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा (Great Power Rivalry) समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को जटिल बनाती है।
• रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखते हुए विभिन्न साझेदारियों के बीच संतुलन बनाना भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है।
• दीर्घकालिक नौसैनिक तैनाती के लिए पर्याप्त वित्तीय एवं परिचालन संसाधनों की आवश्यकता होती है।
• क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर व्यापक सैन्य संघर्ष का जोखिम भी बढ़ सकता है।
आगे की राह
• लाल सागर एवं पश्चिमी हिंद महासागर में वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा हेतु समर्पित समुद्री सुरक्षा ढाँचा विकसित किया जाए।
• IFC-IOR तथा साझेदार देशों की नौसेनाओं के माध्यम से खुफिया जानकारी साझा करने एवं समुद्री क्षेत्र जागरूकता को सुदृढ़ किया जाए।
• फ्रांस, जापान एवं क्षेत्रीय तटीय देशों के साथ समन्वित गश्त तथा लॉजिस्टिक सहयोग को बढ़ाया जाए।
• उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में संचालित भारतीय व्यापारी जहाजों एवं भारतीय नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
• भारत की SAGAR दृष्टि के अनुरूप नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था, नौवहन की स्वतंत्रता तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को निरंतर बढ़ावा दिया जाए।
निष्कर्ष
• बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अब केवल एक क्षेत्रीय समुद्री चोक-पॉइंट नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार एवं भारत की आर्थिक सुरक्षा की जीवनरेखा बन चुका है।
• हिंद महासागर की एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में भारत को कूटनीतिक सक्रियता, सशक्त नौसैनिक क्षमता एवं क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
• इससे नौवहन की स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी तथा नियम-आधारित एवं स्थिर समुद्री व्यवस्था को बल मिलेगा।
• सक्रिय समुद्री नेतृत्व भारत के रणनीतिक, आर्थिक एवं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।
वर्णनात्मक प्रश्न:
“लाल सागर की समुद्री सुरक्षा भारत के आर्थिक एवं रणनीतिक हितों का एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरी है। भारत के लिए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के महत्व की चर्चा कीजिए तथा क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की संभावित भूमिका का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)”