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भारत के एविएशन को डेटा-ड्रिवन ओवरसाइट की ज़रूरत है

(Source – The Hindu, International Edition, Page no.-10 )

जीएस पेपर 3 – बुनियादी ढांचा और अर्थव्यवस्था

Context

दिसंबर 2025 में भारत की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी इंडिगो में परिचालन संबंधी व्यवधानों के बाद हवाई किरायों में तेज वृद्धि देखी गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अस्थायी मूल्य-सीमा (प्राइस कैप) लगाई और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के संकेत पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने प्रमुख एयरलाइनों से औसत किराए का डेटा मांगा ताकि बाजार प्रभुत्व के संभावित दुरुपयोग की जांच की जा सके।

हालाँकि इस हस्तक्षेप से अल्पकालिक राहत मिली, लेकिन इसने एक गहरी संरचनात्मक समस्या उजागर की: भारत की विमानन नियामक व्यवस्था में व्यवस्थित, डेटा-आधारित निगरानी तंत्र का अभाव है।

मुख्य समस्या

भारत तेजी से विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन रहा है, किंतु नियामक ढांचा अभी भी विश्लेषणात्मक के बजाय प्रतिक्रियात्मक है।

मुख्य चिंताएँ:

सूक्ष्म स्तर पर किराया डेटा का अभाव
मांग-आधारित मूल्य निर्धारण और प्रभुत्व के दुरुपयोग के बीच अंतर करने में कठिनाई
विभिन्न मार्गों और समयावधियों में निरंतर निगरानी तंत्र का अभाव
संरचनात्मक पारदर्शिता के बजाय अस्थायी मूल्य-सीमाओं पर निर्भरता

दीर्घकालिक डेटा के बिना नियामक मूल्य प्रवृत्तियों, बाजार शक्ति और प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार का प्रभावी आकलन नहीं कर सकते।

अमेरिकी मॉडल से सीख

अमेरिका का परिवहन सांख्यिकी ब्यूरो एयरलाइन ओरिजिन एंड डेस्टिनेशन सर्वे (डीबी1बी डेटाबेस) संचालित करता है।

मुख्य विशेषताएँ:

टिकट-स्तरीय डेटा का संग्रह
घरेलू टिकटों का 10 प्रतिशत यादृच्छिक नमूना
वास्तविक भुगतान किए गए किराए, मार्ग और एयरलाइन विवरण
दशकों का ऐतिहासिक डेटा
अनुसंधान और नीति विश्लेषण के लिए सार्वजनिक उपलब्धता

इस डेटाबेस ने निम्नलिखित को संभव बनाया:

कम लागत वाली एयरलाइनों के प्रवेश से किरायों में कमी और यातायात वृद्धि का विश्लेषण
बाजार एकाग्रता का अध्ययन
प्रतिस्पर्धा और मूल्य निर्धारण व्यवहार का आकलन

भारत में इस प्रकार का कोई समकक्ष विश्लेषणात्मक भंडार उपलब्ध नहीं है।

पारदर्शिता का महत्व

किराया पारदर्शिता नियामक निगरानी को रूपांतरित कर सकती है।

बाजार शक्ति की पहचान
यदि एक ही एयरलाइन द्वारा प्रभुत्व वाले मार्गों पर लगातार अधिक किराए दिखते हैं, तो यह संभावित प्रभुत्व का संकेत हो सकता है।

प्रवेश और निकास की निगरानी
प्रतिस्पर्धी के बाहर होने के बाद किरायों में तीव्र वृद्धि प्रतिस्पर्धा में कमी का संकेत दे सकती है।

मांग में वृद्धि का आकलन
पीक सीजन में मूल्य वृद्धि की तार्किकता का अध्ययन संभव होगा।

स्व-नियमन को प्रोत्साहन
जब मूल्य निर्धारण एल्गोरिदम निगरानी के अधीन होते हैं, तो एयरलाइंस अनुपालन सुरक्षा उपायों को शामिल करने के लिए अधिक प्रेरित होती हैं।

पारदर्शिता दंडात्मक साधन से अधिक एक “स्पीड कैमरा” की तरह कार्य करती है, जो अनुशासन को प्रोत्साहित करती है।

10 प्रतिशत नमूना प्रस्ताव

एक संतुलित समाधान के रूप में:

टिकटों के 10 प्रतिशत यादृच्छिक नमूने से डेटा संग्रह
वास्तविक समय प्रतिस्पर्धात्मक निगरानी से बचने हेतु त्रैमासिक विलंबित रिपोर्टिंग
एल्गोरिदम के बजाय केवल मूल्य डेटा पर ध्यान

लाभ:

एयरलाइनों के व्यापारिक गोपनीयता की रक्षा
अनुपालन बोझ में कमी
मूल्य समन्वय के जोखिम में कमी
दीर्घकालिक नीति उपयोगिता का संरक्षण

आज जब एयरलाइंस स्वयं रियल-टाइम डेटा का उपयोग करती हैं, तो पारदर्शिता प्रतिस्पर्धा को बाधित नहीं करती बल्कि नियामक निगरानी को संस्थागत बनाती है।

संस्थागत प्रभाव

डेटा-आधारित प्रणाली:

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की भूमिका को केवल यात्री संख्या से आगे बढ़ाकर बाजार निगरानी तक विस्तारित करेगी
प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच को अनुभवजन्य साक्ष्य प्रदान करेगी
मार्ग आवंटन और स्लॉट प्रबंधन में नीति सुधार करेगी
शैक्षणिक और नीतिगत अनुसंधान हेतु ऐतिहासिक डेटा उपलब्ध कराएगी
हवाई किरायों में सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करेगी

सबसे महत्वपूर्ण, यह नियमन को अस्थायी मूल्य-सीमाओं से हटाकर संरचनात्मक निगरानी की ओर ले जाएगा।

व्यापक आर्थिक महत्व

विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ:

मार्ग संपर्क क्षेत्रीय विकास को प्रभावित करता है
किराया स्थिरता पर्यटन और व्यापार गतिशीलता को प्रभावित करती है
एकाग्रता के साथ बाजार जोखिम बढ़ते हैं
डिजिटल एल्गोरिदम गतिशील मूल्य निर्धारण को तीव्र करते हैं

भारत की अवसंरचनात्मक महत्वाकांक्षाओं के साथ नियामक क्षमता का भी विकास आवश्यक है।

निष्कर्ष

भारत का विमानन बाजार तीव्र गति से बढ़ रहा है, किंतु नियामक तंत्र अभी भी पुराना है। दिसंबर 2025 की किराया वृद्धि ने प्रतिक्रियात्मक मूल्य-सीमाओं की सीमाएँ स्पष्ट कर दीं।

टिकट-स्तरीय 10 प्रतिशत डेटा ढांचा निम्नलिखित सुनिश्चित कर सकता है:

साक्ष्य-आधारित नियमन
प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन
उपभोक्ता संरक्षण
पूर्वानुमेय नीति हस्तक्षेप

अब समय है कि भारत का विमानन नियामक संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर आधुनिक, डेटा-आधारित नियामक ढांचा विकसित करे — जहाँ एल्गोरिदम प्रतिस्पर्धा करें, पर पारदर्शिता निगरानी बनाए रखे।


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