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भारत की ग्रोथ स्टोरी में असमानता को समझना

(सोर्स – द हिंदू, इंटरनेशनल एडिशन – पेज नंबर – 8)

टॉपिक : GS पेपर: GS-3 (इंडियन इकोनॉमी, इनक्लूसिव ग्रोथ, गरीबी और असमानता)

प्रसंग

संपादकीय में भारत में बढ़ती सामाजिक-आर्थिक असमानता का विश्लेषण किया गया है। यह विशेष रूप से घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के निष्कर्षों के आधार पर यह तर्क देता है कि आधिकारिक दावों के बावजूद भारत में असमानता गहरी और संरचनात्मक रूप से बनी हुई है।

मुख्य मुद्दा

मुख्य समस्या भारत में असमानता की निरंतरता और उसके कम आकलन से जुड़ी है, जिसके कारण हैं:

• अपर्याप्त मापन प्रणाली
• शहरी-केंद्रित विकास मॉडल
• उपभोग और संपत्ति का असमान वितरण

यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है:

क्या भारत की विकास प्रक्रिया वास्तव में संरचनात्मक असमानताओं को कम कर रही है, अथवा विकास का लाभ केवल कुछ वर्गों और क्षेत्रों तक सीमित है?

असमानता के मापन को समझना

संपादकीय असमानता के विभिन्न आयामों को रेखांकित करता है:

• आय असमानता
• संपत्ति असमानता
• उपभोग व्यय असमानता

मापन संबंधी चुनौतियाँ:

• विभिन्न सर्वेक्षणों की पद्धति में अंतर
• उच्च आय वर्ग का सीमित आकलन
• आँकड़ों की तुलना में कठिनाई

मुख्य निष्कर्ष:

• HCES 2023-24 के अनुसार उपभोग असमानता (गिनी सूचकांक लगभग 0.29) विश्व बैंक के पूर्व अनुमानों से अधिक है।

शहरी-ग्रामीण असमानता

• शहरी भारत, ग्रामीण भारत की तुलना में अधिक असमान है।

• उपभोग में वृद्धि मुख्यतः गैर-खाद्य व्यय के कारण हुई है।

अवलोकन:

• शहरी क्षेत्रों में गैर-खाद्य व्यय ग्रामीण क्षेत्रों से कहीं अधिक है।

• उच्च आय वाले शहरी वर्ग कुल उपभोग पर प्रभुत्व रखते हैं।

निहितार्थ:

• विकास का लाभ मुख्यतः शहरी और समृद्ध वर्गों तक सीमित है।

उपभोग असमानता की प्रकृति

• गैर-खाद्य व्यय में असमानता, खाद्य व्यय की तुलना में अधिक है।

• शीर्ष 10% आबादी कुल उपभोग का अत्यधिक बड़ा हिस्सा खर्च करती है।

उदाहरण:

• शहरी क्षेत्रों में शीर्ष आय वर्ग गैर-खाद्य उपभोग पर अत्यधिक व्यय करता है, जबकि निम्न वर्ग पीछे रह जाते हैं।

मुख्य अंतर्दृष्टि:

• जीवनशैली और संपत्ति आधारित असमानता, मूलभूत उपभोग असमानता की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है।

वर्ग आधारित असमानता

• 1980 के दशक के बाद शहरी अभिजात वर्ग, पेशेवरों और प्रबंधकों को अधिक लाभ मिला।

• अनौपचारिक श्रमिक, छोटे किसान और कृषि मजदूर अपेक्षाकृत पीछे रह गए।

परिणाम:

• शहरी भारत में वर्ग आधारित असमानता बढ़ी है।

अवलोकन:

• कल्याणकारी योजनाएँ संरचनात्मक असमानताओं को मूल रूप से बदलने में सफल नहीं रही हैं।

आधिकारिक आँकड़ों की सीमाएँ

• राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) अत्यधिक अमीर वर्ग का सही आकलन नहीं कर पाते।

• केवल उपभोग आधारित आँकड़े संपत्ति की वास्तविक एकाग्रता को कम करके दिखाते हैं।

चिंता:

• आधिकारिक दावे असमानता की वास्तविक गहराई को कम करके प्रस्तुत कर सकते हैं।

अंतर्विभाजित असमानता (Intersectional Inequality)

संपादकीय के अनुसार असमानता का विश्लेषण निम्न आधारों पर भी होना चाहिए:

• जाति
• वर्ग
• लिंग
• धर्म
• क्षेत्र

निहितार्थ:

• आर्थिक असमानता सामाजिक संरचनाओं और पदानुक्रम से जुड़ी हुई है।

नीतिगत और कल्याण संबंधी चिंताएँ

हाल के सुधार, जैसे:

• श्रम संहिताएँ
• ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में परिवर्तन

ने अनौपचारिक श्रमिकों और ग्रामीण कल्याण को लेकर चिंताएँ बढ़ाई हैं।

अवलोकन:

• यदि नीतियाँ इस धारणा पर आधारित हों कि असमानता घट रही है, तो कल्याणकारी सुरक्षा कमजोर हो सकती है।

विकास और असमानता का संबंध

• भारत की आर्थिक वृद्धि उपभोग आधारित रही है, लेकिन उसका वितरण असमान है।

• शहरी-केंद्रित विकास मॉडल क्षेत्रीय और सामाजिक विषमताओं को बढ़ाता है।

मुख्य चिंता:

• पुनर्वितरण के बिना आर्थिक वृद्धि सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकती है।

आगे की राह

• असमानता मापन की बेहतर प्रणाली विकसित की जाए।

• आय, संपत्ति और उपभोग — तीनों संकेतकों को सम्मिलित किया जाए।

• ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों को अधिक समर्थन दिया जाए।

• समावेशी और रोजगार-सृजन आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाए।

• सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं के आधार पर कल्याणकारी नीतियाँ बनाई जाएँ।

• वर्गीय और क्षेत्रीय असमानताओं को लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से कम किया जाए।

निष्कर्ष

भारत की विकास गाथा को उसकी गहरी और स्थायी असमानताओं को समझे बिना पूर्ण रूप से नहीं समझा जा सकता।

यद्यपि आर्थिक वृद्धि ने नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन उसके लाभ सभी वर्गों और क्षेत्रों तक समान रूप से नहीं पहुँचे हैं।

वास्तविक समावेशी विकास के लिए आवश्यक है कि असमानता का सटीक आकलन किया जाए, कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाया जाए और ऐसी नीतियाँ अपनाई जाएँ जो संरचनात्मक विषमताओं को सीधे संबोधित करें।


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