PIB DECEMBER 2019 HINDI EDITION

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रोटावायरस वैक्सीन – रोटावा-सी5डी-आर 

  • जेम
  • जेम’ एक संपूर्ण ऑनलाइन मार्केटप्‍लेस हैजो सभी विक्रेताओं को स्‍वयं का पंजीकरण कराने और इस प्‍लेफॉर्म पर सौदे करने की सुविधा प्रदान करता है। सभी तरह के सत्‍यापन ऑनलाइन एकीकरण के जरिए किये जाते हैं। जेम समावेश के साथ-साथ सरकार के साथ कारोबार में सुगमता को भी बढ़ावा देता है। यह एक पारदर्शी ऑनलाइन मार्केटप्‍लेस हैजो न केवल सार्वजनिक खरीद की गति को तेज करता हैबल्कि इसके साथ ही सरकार के लिए व्‍यापक बचत भी सुनिश्चित करता है।   

 

  • भारत बॉन्ड ईटीए
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू), केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई), केंद्रीय सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (सीपीएफआई) और दूसरे सरकारी संगठनों के लिए पूंजी के अतिरिक्त स्रोत के तौर पर लाया गया है।
  • भारत बॉन्ड ईटीएफ देश में पहले कार्पोरेट बॉन्ड ईटीएफ होगा।

भारत बॉन्ड ईटीएफ की विशेषताएं

  • ईटीएफ सीपीएसई/सीपीएसयू/सीपीएफआई/दूसरे सरकारी संगठनों के बॉन्ड (शुरुआत में सभी एएए बॉन्ड ) के बॉन्डस की बास्केट होगा।
  • विनिमय पर व्यापार योग्य
  • 1,000 रुपये की छोटी ईकाई।
  • पारदर्शी एनएवी (दिनभर एनएवी का सामयिक लाइव)।
  • पारदर्शी पोर्टफोलियो (वेबसाइट पर रोजाना प्रकाशन)।
  • कम लागत (0.0005%)

भारत बॉन्ड ईटीएफ का ढांचाः

  • प्रत्येक ईटीएफ की एक निर्धारित परिपक्वता तिथि होगी।
  • ईटीएफ जोखिम पुनरावृत्ति के आधार पर बुनियादी सूचकांक पर नजर रखेगा यानी क्रेडिट गुणवत्ता और सूचकांक की औसत परिपक्वता का मिलान करेगा।
  • सीपीएसई, सीपीएसयू, सीपीएफआई अथवा दूसरे सरकारी संगठनों के बॉन्ड्स के ऐसे पोर्टफोलियो में निवेश करेगा, जो ईटीएफ की परिपक्वता अवधि से पहले अथवा उसी समय परिपक्व होंगे।
  • अभी तक इसमें दो परिपक्वता श्रेणियां है – तीन एवं 10 वर्ष। प्रत्येक श्रेणी में उसी परिपक्वता श्रेणी का एक अलग सूचकांक होगा

    सूचकांक की कार्यप्रणालीः

  • सूचकांक का निर्माण एक स्वतंत्र सूचकांक प्रदाता – राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज – द्वारा किया जाएगा
  • विशिष्ट परिपक्वता वर्षों – 3 एवं 10 वर्ष को ट्रैक करने वाले विभिन्न सूचकांक।

      निवेशकों को भारत बॉन्ड  ईटीएफ का लाभः

  • बॉन्ड ईटीएफ सुरक्षा (सीपीएसई और दूसरी सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी किए गए खास बॉन्ड), नकदी (विनिमय पर व्यापार योग्य) और अनुमानित कर कुशल रिटर्न उपलब्ध कराएगा।
  • यह खुदरा निवेशकों को कम राशि के बॉन्ड्स (1,000 रुपये तक) में पहुंच उपलब्ध कराएगा, जिससे बॉन्ड बाजारों में आसान और कम लागत वाली पहुंच मिल सके।
  • यह खुदरा निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाएगा, जो नकदी और पहुंच में बाधाओं के चलते बॉन्ड बाजारों में भागीदारी नहीं करते हैं।
  • कूपन के तौर बॉन्ड की तुलना में मामूली कर की दरों पर बॉन्ड, कर दक्षता लाते हैं। बॉन्ड  ईटीएफ सूचीकरण के लाभ के साथ होते हैं, यह निवेशकों को होने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स में काफी कमी लाता है।

सीपीएसई के लिए भारत बॉन्ड ईटीएफ के लाभ

  • बॉन्ड ईटीएफ सीपीएसई, सीपीएसयू, सीपीएफआई और दूसरे सरकारी संगठनों को अपनी कर्ज की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग वित्त व्यवस्था से अलग एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराता है।
  • यह खुदरा और एचएनआई भागीदारी के जरिये उनके निवेशकों का आधार बढ़ाता है, जिससे उनके बॉन्ड की मांग बढ़ सकती है। बॉन्ड की मांग बढ़ने के साथ इसके जारीकर्ता कम लागत पर उधार लेने में सक्षम हो सकते हैं, जिससे एक नियत समयावधि के लिए उधार लेने की उनकी लागत कम हो जाती है।
  • विनिमय पर व्यापार से बॉन्ड ईटीएफ बुनियादी बॉन्ड्स के लिए बेहतर कीमत का पता लगाने में मदद करेगा।
  • चूंकि सीपीएसई की उधार की जरूरतों का आकलन करने के लिए प्रत्येक वर्ष एक व्यापक ऋण कैलेंडर तैयार और अनुमोदित किया जाएगा, यह कम से कम इस निवेश की सीमा तक सीपीएसई में उधार अनुशासन को विकसित करेगा।

बॉन्ड  बाजारों पर प्रभाव

  • नियत लक्ष्य वाले परिपक्वता बॉन्ड ईटीएफ से समूचे कैंलेडर वर्ष में विभिन्न परिपक्वताओं के साथ एक मुनाफा श्रेणी और बॉन्ड ईटीएफ का सोपान बनने की उम्मीद है।
  • ईटीएफ से भारत में नए बॉन्ड ईटीएफ को लेकर एक नया ईको-सिस्टम यानी पारिस्थितिकी तंत्र – मार्केट मेकर्स, सूचकांक प्रदाता एवं निवेशकों में जागरुकता –  बनने की उम्मीद है।
  • इससे भारत में बॉन्ड ईटीएफ का दायरा बढ़ने की संभावना है। इससे व्यापक स्तर पर प्रमुख उद्देश्यों – बॉन्ड बाजारों को मजबूत बनाने, खुदरा भागीदारी को बढ़ाने और उधार लेने की लागत को कम करने – को हासिल किया जा सकेगा।
  • एकल स्‍कूल अभियान
  • इस संगठन का उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय बच्चों में शिक्षा को बढ़ावा देना है।
  • एकल विद्यालय ग्रामीण और जनजातीय भारत तथा नेपाल के एकीकृत और समग्र विकास के लिए शुरू किया गया एक आंदोलन है। इस आंदोलन की प्रमुख गतिविधि पूरे भारत में एक-शिक्षक स्कूल (जिसे एकल विद्यालय के रूप में जाना जाता है) चलाना है। ऐसे स्‍कूल हर बच्चे को शिक्षा उपलब्‍ध कराने के लिए दूरदराज स्थित ग्रामीण और जनजातीय गांवों में चलाए जाते हैं।

 

  • प्रधानमंत्री वन धन योजना (पीएमवीडीवाई)
    • प्रधानमंत्री वन धन योजना (पीएमवीडीवाईजनजातीय स्‍वयं सहायता समूह बनाने और उन्हें जनजातीय उत्पादक कंपनियों के रूप में मजबूत बनाने के लिए एक बाजार से जुड़ा हुआ जनजातीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम हैजिसे देश के सभी 27 राज्यों की भागीदारी के साथ लॉन्च किया गया है
    • जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत ट्राइफेड देश और दुनिया भर में भारतीय जनजातीय  शिल्प और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए रितु बेरी डिजाइन के साथ साझेदारी करने जा रही है।

     

    • प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्‍थान महा‍भियान (पीएम-कुसुम) योजना
    • इस योजना के तहत 2022 तक 26 गीगावॉट क्षमता और 1.7 मिलियन किसानों को लक्षित किया गया है।
    • कुसुम का उद्देश्‍य ग्रागीण भू-मालिकों को एक स्थिर, निरंतर और दीर्घकालिक आय का स्‍त्रोत प्रदान करना है।
    • इसके फायदों में ग्रामीण लोड केन्‍द्रों और कृषि पंप सेटो के लिए केन्द्रित स्‍थानीय स्‍वच्‍छ बिजली, ग्रिड लोड को जोड़े बिना ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करना; पारेषण नुकसान को कम करना; मंहगे और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल चलित पम्‍पों का कम इस्‍तेमाल तथा सिचांई के विश्‍वसनीय स्‍त्रोत शामिल हैं

     

    • भारतीय संस्कृति वेब पोर्टल
    • भारतीय संस्कृति पोर्टल पहला सरकारी अधिकृत पोर्टल है जहाँ संस्कृति मंत्रालय के विभिन्न संगठनों के ज्ञान और सांस्कृतिक संसाधन अब एक ही मंच पर सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध हैं
    • यह परियोजना प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा हैजो देश और विदेश दोनों में भारत की समृद्ध मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की जानकारी देता है।
    • भारतीय संस्कृति पोर्टल का बड़ा उद्देश्य नागरिकों में हमारे देश की विविध विरासत के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
    • सामग्री अंग्रेजी और हिंदी भाषा में एक इंटरैक्टिवउपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस में उपलब्ध
    • पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री में मुख्य रूप से दुर्लभ पुस्तकेंई-पुस्तकेंपांडुलिपियांसंग्रहालय की कलाकृतियोंआभासी दीर्घाओंअभिलेखागारफोटो अभिलेखागारगजेटियरभारतीय राष्ट्रीय ग्रंथ सूचीवीडियोचित्रव्यंजनयूनेस्कोभारत के संगीत उपकरण शामिल हैं।
    • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई
    • एनएचएआई का निवेश ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 तथा भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड (आधारभूत संरचना ट्रस्ट) के विनियम, 2014 के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा।
    • ट्रस्ट का उद्देश्य आधारभूत परियोजनाओं (वित्त मंत्रालय द्वारा परिभाषित) में मुख्य रूप से निवेश करना है।
    • आईएनवीआईटी प्रत्यक्ष रूप से या एसपीवी और या शेयर पूंजी के माध्यम से संपत्ति का स्वामित्व रख सकता है।
    • आरआईएसएटी-2बीआर1
    • आरआईएसएटी-2बीआर1 एक रडार इमेजिंग पृथ्वी निरीक्षण उपग्रह है यह उपग्रह कृषिवानिकी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा। आरआईएसएटी-2बीआर1 की मिशन आयु 5 वर्ष है।

     

    • बिम्सटेक
    • बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेकएक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सात सदस्य देश शामिल हैं।
    • यह उप-क्षेत्रीय संगठन 6 जून1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से अस्तित्व में आया।

     

    • भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा)
    • इरेडा भारत का अग्रणी वित्‍तीय संस्‍थान है, जो स्‍वच्‍छ ऊर्जा के विस्‍तार के लिए समर्पित है।
    • वर्ष 1987 में एमएनआरई के अधीन अपनी स्‍थापना के समय से ही इरेडा ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के सबसे बड़े हिस्‍से का वित्‍त पोषण किया है।

     

    • अंतर्राष्‍ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस
    • भारत एकमात्र एशियाई देश है जो दोबारा इस सम्‍मेलन का आयोजन कर रहा है। भारत ने पहली बार 1964 में 22वें आईजीसी का आयोजन किया था।

     

    • सीमा सड़क विकास बोर्ड (बीआरबीडी
    • सीमा सड़क विकास बोर्ड (बीआरबीडीकी स्थापना 1960 में रक्षा तैयारियों में वृद्धि करने और सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए उत्तरी और पूर्वोत्‍तर राज्यों में सड़क निर्माण परियोजनाओं के त्वरित निष्पादन के लिए की गई थी। बीआरओबीआरबीडी की कार्यकारी शाखा है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में योगदान देते हुए बीआरओ ने पड़ोस में कुछ मित्र देशों में भी सड़कों का विकास किया है। ‘

     

    • ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो (बीईई)
    • बीईईऊर्जा मंत्रालय के तहत कार्य करने वाला एक सांविधिक निकाय है जो ऊर्जा दक्षता और संरक्षण की दिशा में नीति और कार्यक्रमों को लागू करने के लिए अनिवार्य है।
    • इस तरह की पहल का उद्देश्य हमारे देश में ऊर्जा की मांग को कम करने, ऊर्जा की तीव्रता को कम करने और ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को भी कम करना है जो ग्लोबल वार्मिंग (भूमण्डलीय तापमान वृद्धि) और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं
    • ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो के जरिये विद्यत मंत्रालय विभिन्‍न नीतियां एवं योजनाएं कार्यान्‍वित कर रहा हैजिनमें पीएटी स्‍कीम, मानक एवं लेबलिंग, ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता एवं मांग पक्ष का प्रबंधन भी शामिल हैं। ये कार्यक्रम ऊर्जा की उल्‍लेखनीय बचत करने के साथ-साथ पूरे समाज में ऊर्जा के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित हो रहे हैं.

     

    • सूर्यग्रहण
    • सूर्य ग्रहण किसी अमावस्या के दिन घटित होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है तथा उस समय ये तीनों एक ही सीध में रहते हैं । वलयाकार सूर्य ग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा का कोणीय व्यास सूर्य की अपेक्षा छोटा होता है जिसके फलस्वरूप वह सूर्य को पूर्णतया ढक नहीं पाता है । परिणामतचंद्रमा के चतुर्दिक सूर्य चक्रिका का छल्ला ही दिखाई देता है ।
    • ग्रहणग्रस्त सूर्य को थोड़ी देर के लिए भी नंगी आँखों से नहीं देखा जाना  चाहिए । चंद्रमा सूर्य के अधिकतम हिस्सों को ढक दे तब भी इसे खाली आँखों से न देखें क्योंकि यह आँखों को स्थाई नुकसान पहुँचा सकता है जिससे अंधापन हो सकता है । सूर्य ग्रहण को देखने की सबसे सही तकनीक है ऐलुमिनी माइलरकाले पॉलिमर, 14 नंशेड के झलाईदार काँच जैसे उपयुक्त फिल्टर का उपयोग करना अथवा टेलेस्कोप के माध्यम से श्वेत पट पर सूर्य की छाया का प्रक्षेपण करना.

     

    • ब्रह्मोस
    • हवा से जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल ढाई टन वजनी सुपरसोनिक मिसाइल
    • मारक क्षमता 300 किलोमीटर
    • ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय वायु सेना को समुद्र या जमीन पर स्थित किसी भी लक्ष्य पर रात या दिन में तथा सभी तरह के मौसम की स्थितियों में सटीक निशाना लगाने की वांछित क्षमता प्रदान करती है।

     

    • गवर्नमेंट ई-मार्केट प्‍लेस यानी जीईएम
    • राष्‍ट्रीय सार्वजनिक खरीददारी पोर्टल है जो केन्‍द्र और राज्‍य सरकार के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों, स्‍वायत्त संस्‍थानों और स्‍थानीय निकायों की सभी खरीददारी जरूरतों के समस्‍त समाधान उपलब्‍ध कराता है।
    • 9 अगस्‍त, 2016 को अपनी स्‍थापना से ही जीईएम ने प्रौद्योगिकी के उपयोग और खरीददारी को संपर्क रहित, कागज रहित और कैशलेस बनाकर सार्वजनिक खरीदारी का स्‍वरूप बदल दिया है।
    • निर्विक
    • निर्विक’ योजना को निर्यात क्रेडिट बीमा योजना (ईसीआईएस) के नाम से भी जाना जाता है।
    • सरकार की इस पहल का उद्देश्‍य उद्योग के सामने आ रही निर्यात वित्त पोषण की समस्‍याओं का समाधान करना है।

     

    • हांगकांग अंतर्राष्‍ट्रीय सुरक्षित व पर्यावरण अनुकूल पोत पुनर्चक्रण सम्‍मेलन, 2009 – पोत के पुनःचक्रण से सम्बंधित

     

    • राष्‍ट्रीयब्रॉडबैंड मिशन
      • राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन का विजन डिजिटल संचार ढांचे कात्वकरित विकास, डिजिटल अंतर को समाप्त करना, डिजिटल सशक्तिकरण तथा समावेश पर आधारित है। मिशन का उद्देश्य तथा सभी नागरिकों के लिए किफायती और सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करना है। मिशन का उद्देश्यश तीन सिद्धांतों पर आधारित है :- सभी के लिए उपलब्ध ता, गुणवता युक्त  सेवा तथा किफायती सेवा।

    मिशन के लक्ष्‍य निम्‍न हैं :-

    • सभी गांव में 2022 तक ब्रॉडबैंड सेवा।
    • ग्रामीण व सुदूर क्षेत्रों समेत पूरे देश में ब्रॉडबैंड सेवा की उपलब्‍धता।
    • ऑप्‍टिक फाइबर केबल 30 लाख कि.मी. रूट में बिछाया गया। टावर घनत्‍व 2024 तक प्रति एक हजार की आबादी पर 0.42 से बढ़कर 1.0 हो जाएगा।
    • मोबाइल और इंटरनेट सेवा की गुणवता बेहतर होगी।
    • राज्‍यों / केन्‍द्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्‍ल्‍यू) मॉडल विकसित किया जाएगा। ऑप्टिक फाइबर बिछाने समेत डिजिटल अवसंरचना के विस्‍तार संबंधी नीतियों के लिए यह मॉडल सहायक होगा
    • राज्‍य / केन्‍द्र शासित प्रदेश में उपलब्‍ध डिजिटल संचार अवसंरचना और अनुकूल नीति ईको-सिस्‍टम को मापने के लिए ब्रॉडबैंड रेडीनेस इंडेक्‍स (बीआरआई) विकसित किया जाएगा।
    • पूरे देश के लिए डिजिटल फाइबर मानचित्र तैयार किया जाएगा। इसमें संचार नेटवर्क व अवसंरचना, आप्टिक फाइबर केबल, टावर आदि को शामिल किया जाएगा।
    • हितधारकों द्वारा 100 बिलियन डॉलर (सात लाख करोड़ रूपये) का निवेश। इसमें यूनिवर्सल सर्विस आब्‍लिगेशन फंड (यूएसओएफ) का 70,000 करोड़ रूपये का निवेश शामिल।
    • डिजिटल अवसंरचना और सेवाओं के निर्माण तथा विस्‍तार को गति प्रदान करने के लिए नीतिगत और नियामक संबंधी नियमों में बदलाव करना।
    • मिशन में निवेश के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों तथा वित्‍त मंत्रालय समेत सभी हितधारकों के साथ कार्य करना।

     

    • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई)

     

    • गरीब परिवारों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ रसोई ईंधन प्रदान करने और देश में रसोई गैस के रूप में एलपीजी का सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने मई 2016 में 5 करोड़ के प्रारंभिक लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) लांच किया। मार्च, 2020 तक गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को 8 करोड़ कनेक्शन देने के लिए इसमें संशोधन किया गया। लक्ष्य से 7 महीने पहले यानी 7 सितंबर, 2019 को यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।

     

    • दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन
    • डीएवाई-एनयूएलएम का प्रमुख लक्ष्य शहरी बेघरों सहित शहरी गरीब हैं और इसमें शहरी आबादी के कमजोर वर्गों जैसे- अनुसूचित जाति/ जनजाति, अल्पसंख्यकों, महिला मुखिया वाले परिवार, रेहड़ी-पटरी वाले, कूड़ा बीनने वाले आदि पर विशेष ध्यान दिया गया है।
    • यह शहरी गरीबों की स्वरोजगार और प्रशिक्षित मजदूरी रोजगार अवसरों तक पहुंच बनाने, शहरी बेघरों को आवश्यक सेवाओं के साथ आश्रय प्रदान करने और रेहड़ी-पटरी वालों को उपयुक्त स्थान की सुविधा देकर उनकी सहायता करने, संस्थागत ऋण, सामाजिक सुरक्षा आदि प्रदान करती है।
      • पिनाका एम.के.-2 रॉकेट को मिसाइल के रूप में सुधारा गया है, जिसमें नौसंचालन, नियंत्रण और दिशा-प्रणाली जोड़ी गई हैं, ताकि उसकी सटीकता और रेंज में इजाफा हो सके। मिसाइल की नौसंचालन प्रणाली को भारतीय क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली से भी मदद मिलती है
      • इस मिशन ने रेंज, सटीकता और संचालन प्रणाली की सभी गतिविधियों को कामयाबी से पूरा किया। इसकी ट्रैकिंग टेलीमेट्री, रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग प्रणाली से की जाती है। मिसाइल प्रणाली को डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने विकसित किया है, जिनमें आयुध अनुसंधान एवं विकास स्थापना (एआरडीईई), अनुसंधान केन्द्र इमारत (आरसीआई), रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), प्रूफ एवं प्रयोगात्मक संगठन (पीएक्सई) और उच्च उर्जा पदार्थ अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) शामिल हैं।
      • इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मोबिलिटी:
      • भारत सरकार ने2011 में नेशनल मिशन ऑन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (एनएमईएम) को मंजूरी दी और उसके बाद में 2013 में प्रधानमंत्री द्वारा राष्‍ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 (एनईएमएमपी 2020) का उद्घाटन किया गया
      • एनईएमएमपी2020 एक राष्ट्रीय मिशन दस्तावेज है, जो देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को त्‍वरित रूप से अंगीकार करने और उनके विनिर्माण के लिए दृष्टि और विस्‍तृत योजना प्रदान करता है। यह योजना राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा को बढ़ाने, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रदान करने और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक विनिर्माण के क्षेत्र में प्रमुख स्‍थान हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए तैयार की गई है।
      • राष्‍ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लानके तहत FAME योजना 2015 में लायी गयी
      • इस योजना के 3 घटक हैं अर्थात्
      • मांग प्रोत्साहन:
      • चार्जिंग अवसंरचना:
      • प्रचार, आईईसी गतिविधियों सहित प्रशासनिक व्यय:

             25-  ODF,  ODF+,  ODF++

      • आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने  ओडीएफ परिणामों को बनाए रखने और स्वच्छता लक्ष्य प्राप्त करने पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ ओडीएफ+ और ओडीएफ++ प्रोटोकॉलकी शुरूआत की है।
      • जबकि ओडीएफ+ प्रोटोकॉल समुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के ओ एंड एम पर ध्यान केंद्रित करके कार्यक्षमता और उनके निरंतर उपयोग के लिए सीटी/ पीटी के उचित रखरखाव को सुनिश्चित करता है, ओडीएफ++ शौचालय से निकलने वाले मल को सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करता है तथा इस पर भी ध्यान रखता है कि यह मल किसी भी खुली नालियों, पानी में नहीं बहाया जाए
      • आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने वाटर+ प्रोटोकॉलकी शुरूआत की है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अनुपचारित अपशिष्ट जल को खुले वातावरण या जल निकायों में बर्बाद नहीं करे
      • ए. ईजीसीए
      • डीजीसीए की कार्यप्रणाली एवं प्रक्रिया को एक ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर ले जाया जा रहा है, ताकि सेवाओं को तेजी से मुहैया कराया जा सके और इसके साथ ही विनियमन पर करीबी नजर रखी जा सके। प्रायोगिक तौर पर (पायलट) लाइसेंसिंग से संबंधित पहला मॉड्यूल दिसंबर 2019 में लॉन्च किया जाएगा।
      • बी. डिजि‍स्‍काई
      • असैन्‍य (सिविल) ड्रोन उड़ाने के लिए डिजिस्‍काई ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है। डिजिस्‍काई का बीटा वर्जन उपलब्ध है और यह‘कोई अनुमति नहीं, कोई उड़ान नहीं भरने (एनपीएनटी)’ की विशि‍ष्‍टता के आधार पर ड्रोन से संबंधित समस्‍त गतिविधियों यथा ड्रोन एवं पायलटों के पंजीकरण, उड़ान पथ की मंजूरी, उड़ान उपरांत विश्लेषण इत्‍यादि को दर्ज करता है।
      • सी. ईसहज
      • मंत्रालय से संबंधित100 प्रतिशत सुरक्षा मंजूरी को नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा लॉन्‍च किए गए ‘ई-सहज’ ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनलाइन कर दिया गया है। 24 श्रेणियों के संबंध में मंजूरी देने के लिए यह पोर्टल पूरी तरह से काम कर रहा है।

       

       

       

       

       

       

       

       

       

       

       

       

       

      • डिजियात्रा
      • डिजियात्रा’ को शुरू करने के लिए बेंगलुरू और हैदराबाद हवाई अड्डों पर परीक्षण शुरू कर दिया गया है। यात्रि‍यों को बेहतर अनुभव कराने और कतार में लगने पर प्रतीक्षा अवधि को कम करने के लिए इसमें बायोमीट्रिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उनके लिए निर्बाध और परेशानी मुक्त सफर की परिकल्पना की गई है, क्योंकि यात्री ‘ई-गेट्स’ के जरिए जा सकते हैं। इससे चेकिंग प्‍वाइंट्स पर फालतू समय नहीं लगेगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
      • राष्ट्रीय हरित वाहिनियां (एनजीसी) इको-क्लब कार्यक्रम
      • पर्यावरण शिक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण (ईईएटी) पर्यावरण मंत्रालय की स्थापित केन्द्रीय क्षेत्र योजना है, जो 1983-84 से चल रही है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण में छात्रों की भागीदारी को गति प्रदान करना है।
      • योजना के तहत राष्ट्रीय हरित वाहिनियां (एनजीसी) इको-क्लब कार्यक्रम की स्थापना 2001-02 में की गई।
      • इसका उद्देश्य स्कूली छात्रों को उनके आसपास के पर्यावरण के बारे में अनुभव के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना, उनके साथ बातचीत करना और उनकी समस्याओं के बारे में पता लगाना था।
      • इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति उचित रवैया विकसित करना तथा उन्हें पर्यावरण और उसके विकास से संबंधित मुद्दों के बारे में संवेदनशील बनाना है।
      • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
      • पीएमएमवीवाई एक प्रत्यक्ष नकदी लाभ (डीबीट) योजना है, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए और वजन कम होने की आंशिक भरपाई के लिए उनके बैंक खाते में सीधे पैसा जमा किया जाता है।
      • इस योजना का शुभारम्भ 01.01.2017 को किया गया था।
      • इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताओं (पीडब्ल्यूएंडएलएम) को गर्भावस्था का जल्दी पंजीकरण, बच्चे के जन्म का पंजीकरण और परिवार के पहले बच्चे का पहला टीकाकरण चक्र पूरा होने जैसी शर्तों को पूरा करने के बाद तीन किस्तों में 5,000 रुपये का नकदी लाभ मिलता है।
      • जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को नकदी लाभ भी मिलता है। इस प्रकार एक महिला को औसतन 6,000 रुपये मिलते हैं।
      • वन स्टॉप केंद्र (ओएससी) योजना
      • इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना (आईजीएमएसवाई) 31 मार्च, 2017 को बंद कर दी गई।
      • वन स्टॉप केंद्र (ओएससी) योजना के तहत हिंसा प्रभावित महिलाओं को एक ही जगह पर पुलिस सुविधा, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक-सामाजिक परामर्श, कानूनी परामर्श और अस्थायी आश्रय सहित कई सेवाएं उपलब्ध कराता है।
      • अभी तक 728 ओएससी को मंजूरी दी जा चुकी है और 595 ओएससी का परिचालन शुरू किया जा चुका है।
      • यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक- बॉक्स (शी-बॉक्स)
      • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने सरकारी और निजी कर्मचारियों सहित कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली विकसित की है।
      • शी-बॉक्स पोर्टल एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद यह मामले में कार्रवाई के लिए सीधे संबंधित विभाग के पास पहुंच जाती है।
      • रोहतांग दर्रे के नीचे बनी रणनीतिक महत्‍व की सुरंग का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी के नाम पर रखने को मंजूरी

       

      • एनपीआर

      पृष्‍ठभूमि:-

      • देश में हर दस साल बाद जनगणना का काम 1872 से किया जा रहा है।  जनगणना 2021 देश की 16 वीं और आजादी के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। जनसंख्‍या गणना आवासीय स्थिति,सुविधाओं और संपत्तियों,जनसंख्‍या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति , भाषा, साक्षरता और शिक्षा ,आर्थिक गतिविधियों , विस्‍थापन और  प्रजनन क्षमता जैसे विभिन्‍न मानकों पर गांवों, शहरों और वार्ड स्‍तर पर लोगों की संख्‍या के सूक्ष्‍म से सूक्ष्‍म आंकड़े उपलब्‍ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है। जनगणना कानून 1948 और जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्‍ध कराता है।
      • नागरिकता कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के तहत राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। आधार से जोड़े जाने के बाद  2015 में इसकाअद्यतन किया गया था।
      • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)
      • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का शुभारंभ 25 दिसंबर, 2000 को हुआ था। • इसका उद्देश्य आबादी के उन क्षेत्रों को पक्की सड़क से जोड़ना था, जो सड़क-मार्ग से जुड़े हुए नहीं हैं। •            इसके लिए मैदानी इलाकों में 500 तथा विशिष्ट क्षेत्रों (पूर्वोत्तर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तराखंड, मरूस्थलीय क्षेत्र, जनजातीय क्षेत्र और पिछड़े जिले) में 250 लोगों की आबादी को आधार बनाया गया है। •     कार्यक्रम में वर्तमान होकर जाने वाले मार्ग (थ्रोरूट) तथा प्रमुख ग्रामीण लिंक (एमआरएल) के उन्नयन का भी प्रावधान
      • दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई – एनआरएलएम)
      • दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई – एनआरएलएम) का शुभारंभ 2011 में हुआ था। इसका लक्ष्य 9 करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों को चरणबद्ध तरीके से स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के अन्तर्गत लाना है, उन्हें दीर्घकालिक समर्थन प्रदान करना है ताकि वे अपनी आजीविका में विविधता ला सकें, अपनी आय बढ़ा सके और अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सके
      • डीएवाई – एनआरएलएम का लक्षित समूह है – सामाजिक, आर्थिक औऱ जातिगत जनगणना (एसईसीसी, 2011) के आंकड़ों के आधार पर“स्वतः शामिल” सभी परिवार और वे सभी परिवार जिनमें “कम के कम एक अभाव” विद्यामान है। ग्रामीण गरीब परिवारों की सूची को “गरीबों की भागीदारी पहचान” (पीआईपी) के द्वारा मान्यता दी गई है और इस सूची को ग्राम सभा ने भी मान्यता दी है।
      • प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई – जी)
      • सरकार द्वारा 2022 तक“सभी के लिए आवास” को प्राथमिकता देने के संदर्भ में पहले के ग्रामीण आवास कार्यक्रमों की पुर्नसंरचना करके प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई – जी) तैयार की गई है और इस योजना का शुभारंभ 1 अप्रैल, 2016 को किया गया था। पीएमएवाई – जी का लक्ष्य है – सभी बेघरों, कच्चे घर व टूटे-फूटे घरों में रहने वालों लोगों को 2022 तक पक्का आवास देना जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हों।
      • श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (एसपीएमआरएम)
      • पृष्ठभूमिःश्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन एसपीएमआरएम देश के 29 राज्यों और 6 केन्द्र शासित प्रदेशों में स्थित 300 क्लस्टरों के व्यापक विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। ये क्लस्टर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और इनमें थीम आधारित आजीविका गतिविधियों, आबादी बढ़ाने और गैर-कृषि रोजगार आदि के माध्यम से आर्थिक विकास करने की क्षमता है। मिशन को लागू करने का उद्देश्य है – कौशल विकास, आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने और समयबद्ध व न्यायपूर्ण तरीके से प्राथमिक ढांचागत सुविधाओं के माध्यम से इन क्लस्टरों का रूपांतरण। प्रत्येक क्लस्टर के लिए “एकीकृत क्लस्टर कार्ययोजना” (आईसीएपी) तैयार की गई है और इसमें इन सभी घटकों को शामिल किया गया है।
      • एसडीजी इंडिया इंडेक्‍स’
      • एसडीजी इंडिया इंडेक्‍स और डैशबोर्ड 2019-20 को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय, संयुक्‍त राष्‍ट्र (भारत) और ग्‍लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्‍टीट्यूट के सहयोग से विकसित किया गया है।
      • एसडीजी इंडिया इंडेक्‍स और डैशबोर्ड 2019 दरअसल सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के 306 संकेतकों वाले राष्‍ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क से प्राप्‍त किए गए 100 संकेतकों पर सभी राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों में हुई प्रगति का आकलन करते हैं और इसके साथ ही रैंकिंग भी प्रदान करते हैं। इससे यह पता चलता है कि मौजूदा समय में एसडीजी की प्राप्ति के मामले में देश और उसके राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों की क्‍या स्थिति है और इसके साथ ही यह भी पता चलता है कि एसडीजी की प्राप्ति के लिए अभी उन्‍हें कितना और लंबा सफर तय करना पड़ेगा। यह इंडेक्‍स 17 एसडीजी में से 16 को कवर करता है और लक्ष्‍य 17 पर गुणात्‍मक आकलन पेश करता है। यह वर्ष 2018 के इंडेक्‍स की तुलना में बेहतरी को दर्शाता है जिसने केवल 13 लक्ष्‍यों को ही कवर किया था।
      • एसडीजी इंडिया इंडेक्‍स स्‍कोर के आधार पर वर्गीकरण पैमाना कुछ इस तरह से
      • आकांक्षी : 0-49
      • परफॉर्मर : 50-64
      • फ्रंट रनर : 65-99
      • अचीवर : 100
      • प्रधानमंत्री का रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी):
      • पीएमईजीपी दरअसल2008-09 से एमएसएमई मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक मुख्य क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी का कार्यक्रम है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं की मदद करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना है
      • प्रौद्योगिकी केंद्र प्रणाली कार्यक्रम (टीसीएसपी):
      • एमएसएमई मंत्रालय विश्व बैंक की200 मिलियन डॉलर की ऋण सहायता समेत 2200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर प्रौद्योगिकी केंद्र प्रणाली कार्यक्रम (टीसीएसपी) को लागू कर रहा है ताकि 15 नए टूल कक्ष और प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (टीसीएस) स्थापित किए जा सकें और देश भर में मौजूदा 18 टीसीएस का उन्नयन किया जा सके। भिवाड़ी, भोपाल, पुड्डी और तिनसुकिया में चार प्रौद्योगिकी केंद्र कमीशन के लिए तैयार हैं। 
      • डिजिटल एमएसएमई:

      डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई को लाने और उन्हें डिजिटल पहचान प्रदान करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी) और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) जैसे संगठनों को साथ लाया गया है। एमएसएमई हितधारकों के लिए और सभी एमएसएमई सेवा प्रदाताओं को एक मंच पर लाने के लिए पूरे देश में जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं.

      • लीन मैन्युफैक्चरिंग:

      भारतीय गुणवत्ता परिषद् (क्यूसीआई) और राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् (एनपीसी) के माध्यम से पूरे देश में एमएसएमई के 267 क्लस्टरों में इस योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है। इस योजना को अधिक एमएसएमई क्लस्टरों तक ले जाने के लिए राज्य सरकारों और उद्योग संघों को भी साथ लाया गया है।

      • इनक्यूबेशनः

      200 से अधिक तकनीकी संस्थानों, उद्योग संघों, सामाजिक उद्यमों के लिए इनक्यूबेशन केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत वित्त सहायता के लिए नवीन विचारों वाले कारोबारी प्रस्तावों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत स्टार्टअप उद्यमियों को 1 करोड़ रुपये तक की प्रारंभिक पूंजी प्रदान की गई है।

      • डिजाइन क्लिनिक:

      मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), उद्योग संघों, सामाजिक उद्यमों और ग्रामीण व कला आधारित उद्यमों समेत एमएसएमई उद्यमियों को डिजाइन सहायता मुहैया करवाने वाले स्वयं सहायता समूहों के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी संस्थानों के लिए इस डिज़ाइन योजना को शुरू किया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी) द्वारा पहले से ही चलाए जा रहे चार केंद्रों के अलावा विभिन्न स्थानों पर 80 से अधिक नए डिज़ाइन केंद्र खोले गए हैं। सभी एमएसएमई और छात्रों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे इस योजना के तहत फंडिंग के लिए अपने डिजाइन प्रोजेक्ट प्रस्तुत करें।

      • बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर जागरूकता निर्मित करने की योजना:

      देश के विभिन्न हिस्सों में 60 से अधिक नए आईपी सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि एक वकील एमएसएमई को अपने आवेदन करने और ट्रेडमार्क व पेटेंट पंजीकृत करवाने में सहायता कर सके। जीआई के पंजीकरण का आवेदन करने के लिए एफपीओ को सहायता मिलेगी। एमएसएमई को विभिन्न आईपीआर के पंजीकरण के लिए भरपाई दी जा रही है। एमएसएमई के बीच आईपी अधिकारों के लिए अधिक से अधिक जागरूकता पैदा की जा रही है।

      • उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी):

      राज्य सरकारों / उद्योग संघों / सामाजिक उद्यमों / सरकारी निगमों के माध्यम से पूरे देश में विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के आयोजन के लिए ईएसडीपी के अंतर्गत 135 करोड़ रुपये से ज्यादा को मंजूर किया गया है। इस वर्ष के लिए कुल 3000 कार्यक्रम संचालित / स्वीकृत किए गए हैं। 

      • यू. के. सिन्हा समिति

      सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर

      • सुशासन सूचकांक
      • सरकार द्वारा पहली बार सुशासन सूचकांक (जीजीआई) विकसित किया गया है।
      • कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा
      • ‘सुशासन सूचकांक’ दरअसल सभी राज्‍यों में गवर्नेंस की ताजा स्थिति का आकलन करने और राज्‍य सरकारों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों द्वारा उठाये गये विभिन्‍न अहम कदमों के प्रभावों से अवगत होने का एकसमान साधन (टूल) है। सभी राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों में गवर्नेंस की ताजा स्थिति की तुलना करने के लिए मापने योग्‍य डेटा उपलब्‍ध कराना, गवर्नेंस में बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्‍त रणनीतियों को तैयार एवं कार्यान्वित करने में राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों को सक्षम बनाना और परिणाम उन्‍मुख अवधारणाओं एवं प्रशासन की ओर अग्रसर होना जीजीआई के उद्देश्‍यों में शामिल हैं
      • 10 सेक्‍टरों को ध्‍यान
      • राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को इन तीन समूहों में विभाजित किया जाता है : क) बड़े राज्‍य, ख) पूर्वोत्‍तर एवं पहाड़ी राज्‍य और ग) केन्‍द्र शासित प्रदेश
      • NetSCoFAN (भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग नेटवर्क)
      • भोजन और पोषण के क्षेत्र में काम करने वाले शोध व शैक्षणिक संस्थानों का ईट राइट मेला
      • का नेटवर्क है। इस नेटवर्क में विभिन्न प्रमुखों / निदेशकों और वैज्ञानिकों के बारे में विस्तृत जानकारी एक निदेशिका के तहत दी गई है।
      • केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणमंत्रालय द्वारा लॉन्च
      • ईट राइट मेला
      • एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के द्वारा आयोजित
      • प्रकाश टंडन समिति (1994 – रेलवे से सम्बंधित )
      • औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी
      • औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) में शामिल वस्तुओं के भारांक (वेटेज) का 40.27 प्रतिशत हिस्सा आठ कोर उद्योगों में शामिल होता है। आठ कोर उद्योगों के सूचकांक (आधार वर्ष: 2011-12
      • एक भारतश्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम
      • एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में रहने वाली विविध संस्कृतियों के लोगों के बीच सक्रियता बढ़ाना तथा लोगों के बीच अधिक से अधिक पारस्परिक समझ को बढ़ावा देना भी है। कार्यक्रम के अनुसारहर वर्ष प्रत्येक राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की दूसरे राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के साथ जोड़ी बनाई जाएगी ताकि लोगों के बीच पारस्परिक संपर्क को बढ़ावा दिया जा सके। इस आदान-प्रदान के माध्यम से यह परिकल्पना की गई है कि विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और प्रथाओं के ज्ञान से एक दूसरे के बीच समझ और लगाव को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इससे देश की एकता और अखंडता मजबूत होगी। इसके लिए राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को उनके संगीत, नाटक, भोजन, भाषा, इतिहास, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान के अन्‍य तरीकों को शामिल करके जोड़ी बनाए गए राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ आपसी संबंधों की विस्तृत श्रृंखला शुरू करके सांस्‍कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक मिशन शुरू करना है।
      • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)
      • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की पुनर्गठित केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) को 2018-19 में लागू किया गया। मिशन अंत्योदय के साथ 117 आकांक्षी जिलों में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को मजबूत करने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंचायतों को मजबूत बनना इसका प्राथमिक उद्देश्य है।
      • प्रधानमंत्री श्रम योगी मान -धन (पीएम-एसवाईएम)

       स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना फरवरी, 2019 में असंगठित श्रमिकों के लाभ के लिए शुरू की गई थी। यह असंगठित श्रमिकों के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसकी मासिक आय 15000 रुपये या उससे कम है और जिनके पास आधार संख्या के साथ-साथ बचत बैंक/ जन-धन खाता भी है, उनके लिए ये योजना है।इस योजना में शामिल होने की न्यूनतम उम्र 18 जबकि अधिकतम उम्र 40 वर्ष है। इस योजना के तहत, लाभार्थियों को न्यूनतम 3000 रुपये की मासिक सुनिश्चित की गई जो पेंशन के रूप में 60 वर्ष की आयु से लाभार्थियों को प्रदान की जाएगी। इस योजना का नामांकन कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से किया जाता है, जिसके देश भर में 3.50 लाख केंद्र हैं। इसके अलावा पात्र व्यक्ति www.maandhan.in पोर्टल पर जाकर भी स्व-नामांकन कर सकते हैं। इस योजना के तहत, सब्सक्राइबर को निर्धारित मासिक अंशदान राशि का भुगतान करना आवश्यक है और केंद्र सरकार समान योगदान प्रदान करती है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पेंशन निधि प्रबंधक है और पेंशन भुगतान के लिए जिम्मेदार होगा। 

      • व्यापारियोंदुकानदारों और स्व-नियोजित व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना 
      • 09.2019 को शुरू की गई है।यह एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है। इस योजना का नामांकन कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से किया जाता है, जिसके देश भर में 3.50 लाख केंद्र हैं। इसके अलावा पात्र व्यक्ति www.maandhan.in पोर्टल पर जाकर भी स्व-नामांकन कर सकते हैं। 18-40 वर्ष की आयु वाले व्यापारी, सालाना टर्नओवर के साथ जो 1.5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो और जो ईपीएफओ / ईएसआईसी / एनपीएस / पीएम-एसवाईएम या आयकर दाता के सदस्य नहीं हैं, योजना में शामिल हो सकते हैं। इस योजना के तहत, लाभार्थी द्वारा 50% मासिक योगदान देय है और समान योगदान केंद्र सरकार द्वारा भुगतान किया जाता है। 60 वर्ष की आयु के बाद सब्सक्राइबर न्यूनतम 3,000 रुपये की मासिक सुनिश्चित पेंशन के लिए पात्र हैं। 
      • आईएसएफआर) पर  रिपोर्ट
      • आईएसएफआर 1987 से यह काम कर रहा है। उसकी ओर से अबतक देश के वन क्षेत्र का 16 बार आकलन किया जा चुका है और इस संबंध में वह ताजा रिपोर्ट के साथ अबतक 16 रिपोर्ट जारी कर चुका है।